मोर गांव मोर पानी अभियान से जल संरक्षण को नई ताकत, 350 आजीविका डबरियां और 150 से अधिक तालाब बने ग्रामीण विकास की आधारशिला
रायपुर। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (VBG-RAM-G) के अंतर्गत संचालित “मोर गांव मोर पानी” अभियान जिले में जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए ग्रामीण विकास का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। अभियान के तहत अब तक 350 आजीविका डबरियों तथा 150 से अधिक सामुदायिक तालाबों का निर्माण, गहरीकरण और विकास किया जा चुका है। इससे वर्षा जल संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता को नई मजबूती मिल रही है।
मानसून के पानी का होगा अधिकतम संरक्षण
जिला प्रशासन द्वारा मानसून के दौरान प्राप्त होने वाले वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इन जल संरचनाओं का निर्माण कराया गया है। अब इनके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। आजीविका डबरियां और सामुदायिक तालाब न केवल वर्षा जल को संरक्षित करेंगे, बल्कि भू-जल स्तर बढ़ाने और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाएंगे। इससे फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
डबरियों से बढ़ेगी ग्रामीणों की आय
अभियान के अंतर्गत निर्मित 350 आजीविका डबरियां ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बनेंगी। इनका उपयोग—
- मत्स्य पालन
- सब्जी उत्पादन
- उद्यानिकी
- पशुपालन
- अन्य आजीविका गतिविधियों
में किया जा सकेगा। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
150 से अधिक सामुदायिक तालाबों से मिलेगा दीर्घकालिक लाभ
अभियान के तहत बनाए गए 150 से अधिक सामुदायिक तालाब गांवों में जल संचयन क्षमता को बढ़ाएंगे। इनसे—
- सिंचाई सुविधा मजबूत होगी
- पशुओं के लिए पेयजल उपलब्ध होगा
- भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा
- पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी
- गर्मियों में जल संकट से राहत मिलेगी
जनभागीदारी से बन रहा जल संरक्षण जनआंदोलन
जिला प्रशासन का कहना है कि यह अभियान केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम बन रहा है। ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से इसे जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। साथ ही निर्मित जल संरचनाओं के संरक्षण और नियमित रखरखाव पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
जल सुरक्षा की दिशा में आत्मनिर्भर बनेंगे गांव
जिला प्रशासन का मानना है कि जल संरक्षण ही भविष्य की जल सुरक्षा का आधार है। “मोर गांव मोर पानी” अभियान के माध्यम से जल संसाधनों का संरक्षण, भू-जल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने का कार्य लगातार जारी है। आने वाले समय में यह अभियान जिले को जल समृद्ध, आत्मनिर्भर और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रशासन ने सभी ग्रामीणों से अपील की है कि वे निर्मित आजीविका डबरियों और सामुदायिक तालाबों की सुरक्षा, स्वच्छता एवं संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाएं, ताकि जल संरक्षण का यह अभियान लंबे समय तक सफल बना रहे।
