रायपुर पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का किया भंडाफोड़, 42 आरोपी गिरफ्तार
रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन अवैध कॉल सेंटरों पर दबिश दी है। इस इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशन में पुलिस ने कुल 42 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 67 मोबाइल, 18 लैपटॉप, 28 कंप्यूटर और 3 वाई-फाई राउटर जब्त किए गए हैं। यह गिरोह पिछले दो वर्षों से मुख्य रूप से अमेरिकी नागरिकों को अपना निशाना बना रहा था और अब तक करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क पांच चरणों में सुनियोजित तरीके से काम करता था:
प्रथम चरण में डेटा कलेक्शन ग्रुप अमेरिका के उन लोगों की जानकारी जुटाता था जिन्होंने लोन के लिए आवेदन किया हो। इंटरनेट कॉलिंग ऐप के माध्यम से उन्हें कॉल कर प्रोफेशनल स्क्रिप्ट के आधार पर जाल में फंसाया जाता था। द्वितीय चरण में डिपॉजिट ग्रुप पीड़ित का सिबिल स्कोर खराब बताकर उसे सुधारने का झांसा देता था और उनकी बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेता था।
तृतीय चरण तकनीकी रूप से सबसे जटिल था, जिसमें चीन में बैठे नेटवर्क की सहायता से पीड़ित के खाते की जानकारी के आधार पर क्लोन चेक तैयार किए जाते थे। बैंक की तकनीकी प्रक्रिया का लाभ उठाकर अस्थाई रूप से खाते में रकम दिखाई जाती थी। चतुर्थ चरण में विश्वास जीतने के बाद पीड़ित से वह राशि ‘गिफ्ट कार्ड’ के माध्यम से वापस मांगी जाती थी। अंतिम चरण में रिडीम ग्रुप इन गिफ्ट कार्ड्स को कैश में बदलकर हवाला के माध्यम से मास्टरमाइंड तक पहुंचाता था। गिरोह द्वारा पीड़ितों को डराने के लिए फर्जी अरेस्ट वारंट और ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भी सहारा लिया जाता था।
रायपुर के गंज थाना क्षेत्र स्थित पिथालिया कॉम्प्लेक्स में दो और न्यू राजेंद्र नगर के अंजनी टॉवर में एक कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। इस गिरोह का मास्टरमाइंड गुजरात से संचालित हो रहा था, जबकि इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मेघालय, हरियाणा और पंजाब के युवक शामिल थे। गिरफ्तार मुख्य आरोपियों में रोहित यादव, गौरव यादव और सौरभ सिंह शामिल हैं जो इन सेंटरों का पर्यवेक्षण कर रहे थे। पुलिस ने सभी आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्यवाही शुरू कर दी है।
