मचान तकनीक से बदली किस्मत: धमतरी के किसान ने 4 एकड़ में खीरे की खेती से लिखी सफलता की नई कहानी

धमतरी। मेहनत, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किसानों की तकदीर बदल सकता है। इसका जीवंत उदाहरण धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम सेलबहरा के विशेष पिछड़ी जनजाति (कमार समुदाय) के प्रगतिशील किसान खीमांशु गजेसिंग हैं, जिन्होंने पारंपरिक खेती छोड़ वैज्ञानिक तरीके से 4 एकड़ में व्यावसायिक खीरे की खेती कर शानदार सफलता हासिल की है।

मचान तकनीक से बढ़ी गुणवत्ता और मुनाफा

खीरे की खेती में किसान ने मचान (ट्रेलिस) तकनीक अपनाई, जिसमें बेलों को जमीन पर फैलाने के बजाय तार और मचान के सहारे ऊपर चढ़ाया जाता है। इससे फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, सड़ते नहीं हैं और उनका आकार, रंग व चमक बेहतर रहती है। यही वजह है कि बाजार में इन्हें बेहतर कीमत मिल रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से 45 से 50 दिनों में फसल तैयार हो जाती है और एक एकड़ से 30 से 45 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

10 एकड़ में खेती, 4 एकड़ में खीरे का प्रयोग

खीमांशु गजेसिंग के पास कुल 10 एकड़ कृषि भूमि है। इस वर्ष उन्होंने 4 एकड़ में व्यावसायिक खीरे की खेती की। उद्यानिकी विभाग के नियमित मार्गदर्शन से उन्होंने उन्नत बीज, संतुलित पोषण प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई प्रणाली और वैज्ञानिक पौध संरक्षण तकनीकों को अपनाया।

पारंपरिक खेती से आधुनिक खेती तक का सफर

पहले पारंपरिक खेती के कारण उनकी आय सीमित थी और खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता था। लेकिन आधुनिक तकनीकों को अपनाने के बाद उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। आज उनके खीरे की मांग स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ मिल रहा है।

अब दूसरी उद्यानिकी फसलों की तैयारी

अपनी सफलता से उत्साहित किसान खीमांशु गजेसिंग का कहना है कि उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और शासकीय योजनाओं के सहयोग ने उनकी खेती को नई दिशा दी है। अब वे अन्य उद्यानिकी फसलों का भी विस्तार करने और आधुनिक तकनीकों से उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा

उद्यानिकी विभाग लगातार किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। खीमांशु गजेसिंग की सफलता यह साबित करती है कि वैज्ञानिक खेती, सही तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।

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