विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का होगा व्यापक सर्वे, कलेक्टर आकाश छिकारा ने दिए सख्त निर्देश
जिला स्तरीय निगरानी, मेडिकल सत्यापन और योजनाओं से जोड़ा जाएगा हर पात्र बच्चा
राज्य शासन द्वारा विशेष आवश्यकता (दिव्यांग) वाले बच्चों की सही पहचान, प्रमाणिक सत्यापन और अद्यतन डेटा तैयार करने के लिए जिले में व्यापक सर्वेक्षण अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान को पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए कलेक्टर आकाश छिकारा ने संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
कलेक्टर ने इस अभियान को जिला स्तरीय समय-सीमा बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रत्येक स्तर पर नियमित समीक्षा हो और सर्वेक्षण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। अभियान की सफलता के लिए स्वास्थ्य विभाग, समाज कल्याण विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग निभाएगा अहम भूमिका
कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया है कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के मेडिकल परीक्षण के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों और मेडिकल बोर्ड की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इससे दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया तेज होगी।
इसके अलावा विभाग बच्चों की दिव्यांगता का भौतिक सत्यापन करेगा, यूनिक आईडी पोर्टल पर उनका पंजीयन कराने में सहयोग देगा तथा जरूरतमंद बच्चों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए विशेष शिविर आयोजित करेगा। बौद्धिक अक्षमता वाले बच्चों की सही पहचान के लिए मनोवैज्ञानिक (साइकोलॉजिस्ट) की सेवाएं भी ली जाएंगी।
समाज कल्याण विभाग योजनाओं से जोड़ेगा
समाज कल्याण विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वह पेंशन, छात्रवृत्ति, पुनर्वास सहित सभी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी सर्वे टीम को उपलब्ध कराए। सर्वे के दौरान चिन्हित प्रत्येक पात्र दिव्यांग बच्चे को तत्काल संबंधित योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
साथ ही विभाग अपने पास उपलब्ध दिव्यांगता प्रमाण पत्र और दिव्यांगता आईडी से जुड़े रिकॉर्ड भी साझा करेगा, जिससे सर्वेक्षण अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाया जा सके।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तैयार करेंगी प्रारंभिक सूची
महिला एवं बाल विकास विभाग को 0 से 6 वर्ष तक के विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की प्रारंभिक पहचान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों की सूची तैयार करेंगी तथा कुपोषित और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जानकारी एकत्र करेंगी।
इसके साथ ही समुदाय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर अभिभावकों को प्रारंभिक पहचान और समय पर उपचार के महत्व के बारे में भी जागरूक किया जाएगा।
समय पर पहचान से मिलेगा बेहतर उपचार
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर उन्हें समय पर चिकित्सा, पुनर्वास, सहायक उपकरण और शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना है। जिला प्रशासन का मानना है कि समय रहते हस्तक्षेप से ऐसे बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।
