छत्तीसगढ़ में मखाना खेती को बढ़ावा, किसानों के लिए बन रही लाभकारी नकदी फसल

रायपुर, 30 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ में किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ नकदी फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। इसी क्रम में मखाना की खेती एक नए और लाभकारी विकल्प के रूप में उभर रही है। राज्य में मखाना उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार की सेंट्रल सेक्टर स्कीम फॉर डेवलपमेंट ऑफ मखाना को तेजी से लागू किया जा रहा है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय मखाना बोर्ड में शामिल किए जाने की घोषणा के बाद राज्य में मखाना उत्पादन और प्रसंस्करण गतिविधियों को गति मिली है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार वर्ष 2025-26 से योजना का क्रियान्वयन शुरू किया गया है, जिसके लिए 178 लाख 11 हजार रुपये की स्वीकृति मिली है। इस योजना के अंतर्गत धमतरी, बालोद, महासमुंद और गरियाबंद जिलों का चयन किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि मखाना की बाजार में अच्छी मांग है। यदि किसान कच्चे बीज बेचने के बजाय उन्हें सुखाकर, भूनकर और प्रसंस्करण कर मखाना के रूप में बाजार में उतारते हैं तो उन्हें कहीं अधिक लाभ मिलता है।

योजना के तहत राज्य में कुल 133.862 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना उत्पादन किया जाएगा। इसमें किसानों के तालाबों में 96.438 हेक्टेयर और भूमि पर 37.424 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। इसके अलावा कृषि एवं उद्यानिकी विश्वविद्यालयों और विभागीय रोपणियों में 15 हेक्टेयर क्षेत्र में बीज उत्पादन कार्यक्रम भी चलाया जाएगा।

धमतरी जिले में महिला स्व-सहायता समूहों और किसानों की भागीदारी से मखाना उत्पादन शुरू हो चुका है। यहां 43 कृषकों द्वारा 55 एकड़ तालाब क्षेत्र में बीज की बुवाई पूरी कर ली गई है, जबकि 15 एकड़ में तैयारी चल रही है। भूमि पर उत्पादन के लिए भी 20 किसानों के साथ 55 एकड़ क्षेत्र में काम शुरू किया गया है।

वर्ष 2026-27 के लिए दो करोड़ रुपये की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है, जिसमें नए तालाबों का निर्माण और अतिरिक्त क्षेत्र में मखाना उत्पादन शामिल है।

ओजस फार्म की संचालक मनीषा चंद्राकर ने बताया कि छत्तीसगढ़ की जलवायु और मिट्टी मखाना के लिए बेहद अनुकूल है। राज्य में सबसे पहले आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह में व्यावसायिक मखाना उत्पादन की शुरुआत हुई थी और दिसंबर 2021 में पहला प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किया गया। अब यहां किसानों को उत्पादन से लेकर पैकेजिंग तक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि एक किलोग्राम मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम मखाना तैयार होता है, जिसकी बाजार कीमत 700 से 1000 रुपये प्रति किलो तक है। स्वयं उत्पादन और प्रसंस्करण करने पर किसानों को प्रति एकड़ बेहतर मुनाफा मिल सकता है।

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