संभावित कम बारिश से निपटने के लिए धमतरी में कृषि विभाग का विशेष प्रशिक्षण, किसानों को वैज्ञानिक खेती और फसल बीमा की दी गई जानकारी
धमतरी। जलवायु परिवर्तन और ‘सुपर अल नीनो’ के कारण संभावित कम एवं अनियमित बारिश की चुनौती को देखते हुए धमतरी जिले में कृषि विभाग ने किसानों को पहले से तैयार करने की दिशा में अहम पहल की है। शुक्रवार को कृषि विभाग में एक्सटेंशन रिफॉर्म्स ‘आत्मा’ योजना के तहत जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जिलेभर के कृषक मित्रों को वैज्ञानिक खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों और फसल बीमा संबंधी विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
कम बारिश में भी बेहतर उत्पादन के लिए वैज्ञानिक खेती पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों ने बताया कि बदलते मौसम में किसानों को पारंपरिक खेती के बजाय वैज्ञानिक और जल संरक्षण आधारित तकनीकों को अपनाना होगा। कृषक मित्रों से कहा गया कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को कम वर्षा की स्थिति में फसल बचाने के प्रभावी उपायों की जानकारी दें।
विशेषज्ञों ने किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों के साथ-साथ दलहन और तिलहन फसलों की खेती बढ़ाने की सलाह दी। इसके अलावा पानी की बचत के लिए डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक अपनाने, मिट्टी की नमी बनाए रखने, संतुलित पोषण प्रबंधन और उपलब्ध जल का वैज्ञानिक उपयोग करने पर विशेष जोर दिया गया।
फसल बीमा को बताया किसानों का सुरक्षा कवच
प्राकृतिक आपदाओं और सूखे से किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। जिला प्रबंधक ने धान, उड़द, मूंग, कोदो, कुटकी और रागी जैसी अधिसूचित फसलों के बीमा की प्रक्रिया, पात्रता और अंतिम तिथि की जानकारी दी।
कृषक मित्रों से अपील की गई कि वे अधिक से अधिक किसानों को समय सीमा के भीतर फसल बीमा से जोड़ें, ताकि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में उन्हें आर्थिक नुकसान से राहत मिल सके।
गांव-गांव तक पहुंचेगी वैज्ञानिक खेती की जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अनुविभागीय कृषि अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञ, आत्मा योजना के डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक सहित जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में कृषक मित्र मौजूद रहे।
कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों ने कहा कि कृषक मित्र इस प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी को गांव-गांव तक पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक किसान वैज्ञानिक खेती अपनाकर बदलते मौसम की चुनौतियों का सामना कर सकें। उनका कहना था कि आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं का प्रभावी उपयोग ही किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
