कम लागत, ज्यादा उत्पादन: कोरबा के किसान ने अपनाई नैनो उर्वरक तकनीक, बने मिसाल
छत्तीसगढ़ में कृषि को आधुनिक और अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयास अब ज़मीन पर सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने की पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। कोरबा जिले के ग्राम जपेली के किसान रतन सिंह इसकी प्रेरक मिसाल बनकर सामने आए हैं।
करीब साढ़े चार एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले रतन सिंह ने पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया। पिछले वर्ष उन्होंने अपने खेतों में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग शुरू किया, जिसके बाद उन्हें फसलों की वृद्धि और विकास में बेहतर परिणाम देखने को मिले।
रतन सिंह बताते हैं कि कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने पहले नैनो उर्वरकों की जानकारी प्राप्त की और फिर इसका उपयोग किया। उनका अनुभव है कि कम मात्रा में इस्तेमाल होने के बावजूद नैनो उर्वरक अत्यंत प्रभावी साबित हो रहे हैं। इससे पोषक तत्वों का बेहतर प्रबंधन संभव हुआ है और खेती पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक तरीके से होने लगी है।
वे बताते हैं कि नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनके परिवहन, भंडारण और उपयोग में भी काफी सुविधा रहती है। आधुनिक तकनीक अपनाने से उनका खेती के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। यही कारण है कि वे आसपास के किसानों को भी नई कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
रतन सिंह ने इस वर्ष के खरीफ सीजन के लिए भी नैनो डीएपी और नैनो यूरिया की व्यवस्था कर ली है। उनका मानना है कि वर्तमान समय में खेती को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों एवं नवाचार आधारित कृषि तकनीकों को अपनाना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करने और नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी पहल किसानों की आय बढ़ाने और खेती को भविष्य के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
