33 सप्ताह में जन्मे 1.7 किलो के गंभीर नवजात को डॉक्टरों ने नि:शुल्क इलाज से बचाया, निजी अस्पताल में इलाज का खर्च होता 6-7 लाख रुपये

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के चिकित्सकों ने एक बार फिर सेवा, समर्पण और उत्कृष्ट चिकित्सा का उदाहरण पेश किया है। रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के बाल्य एवं शिशु रोग विभाग की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) ने 33 सप्ताह में जन्मे गंभीर रूप से बीमार एक समयपूर्व नवजात को लगातार 50 दिनों तक उपचार देकर नई जिंदगी दी। स्वस्थ होने के बाद शिशु को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया।

जूटमिल, रायगढ़ निवासी ललित और सुगंधी के घर जन्मा यह शिशु मात्र 1.7 किलोग्राम वजन का था। जन्म के तुरंत बाद उसे गंभीर श्वसन समस्या का सामना करना पड़ा और पहले ही दिन से बार-बार दौरे आने लगे। जांच में फेफड़ों में रक्तस्राव, गंभीर संक्रमण (सेप्सिस) और निमोनिया जैसी जटिल स्थितियां सामने आईं, जिसके कारण शिशु को तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा।

इलाज के दौरान नवजात को कई बार रक्त और प्लाज्मा चढ़ाया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने व्यापक एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाओं की मदद से संक्रमण पर सफलतापूर्वक नियंत्रण पाया। स्वास्थ्य में सुधार होने पर शिशु को वेंटिलेटर से हटाकर नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन (NIV) पर लाया गया। भर्ती के दौरान हुए कोलेस्टेटिक पीलिया का भी सफल उपचार किया गया।

डॉ. लक्ष्मणेश्वर कुमार सोनी, विभागाध्यक्ष, बाल्य एवं शिशु रोग ने बताया कि उपचार के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब शिशु की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई थी और निराश होकर उसके माता-पिता अस्पताल आना भी बंद कर चुके थे। इसके बावजूद NICU टीम ने उम्मीद नहीं छोड़ी और लगातार उपचार जारी रखा। धीरे-धीरे शिशु ने स्वयं दूध पीना शुरू किया, उसका वजन बढ़ा और सामान्य गतिविधियां विकसित होने लगीं। अस्पताल से छुट्टी के समय शिशु पूरी तरह स्थिर, दौरे-मुक्त और सामान्य ऑक्सीजन स्तर के साथ स्वस्थ था।

इस कठिन उपचार में डॉ. लक्ष्मणेश्वर कुमार सोनी के नेतृत्व में डॉ. गौरव क्लॉडियस, वरिष्ठ रेसिडेंट डॉ. फारूज अहमद, डॉ. पल्लवी तथा पूरी नर्सिंग एवं पैरामेडिकल टीम ने दिन-रात मेहनत की। शिशु 23 दिन वेंटिलेटर और 17 दिन ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहा, लेकिन टीम के अथक प्रयासों से आखिरकार उसे सुरक्षित जीवन मिल सका।

अस्पताल अधीक्षक डॉ. दुर्गा शंकर पटेल ने कहा कि यह सफलता चिकित्सकों, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की प्रतिबद्धता और टीमवर्क का परिणाम है। उन्होंने बताया कि उपचार के दौरान रक्त, प्लाज्मा सहित सभी आवश्यक सुविधाओं का पूरा खर्च अस्पताल प्रबंधन ने वहन किया। निजी अस्पतालों में इसी तरह के इलाज पर लगभग 6 से 7 लाख रुपये खर्च होते, जबकि रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में यह पूरा उपचार मरीज को निःशुल्क उपलब्ध कराया गया।

मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. संतोष कुमार ने NICU टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि उत्कृष्ट चिकित्सकीय कौशल, सतत निगरानी और टीम भावना का परिणाम है, जिसने एक नन्ही जिंदगी को नया जीवन और परिवार को नई उम्मीद दी है।

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