2 साल से शिक्षा से वंचित दो बेटियों को मिला न्याय, बाल अधिकार आयोग की पहल से माफ हुई फीस और मिली ₹42 हजार की सहायता
रायपुर, 25 जून 2026। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की त्वरित और संवेदनशील पहल से दो वर्षों से शिक्षा से वंचित दो बालिकाओं का भविष्य एक बार फिर रोशन होने जा रहा है। स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (टीसी) और अन्य शैक्षणिक औपचारिकताओं के अभाव में दोनों छात्राओं का दूसरे विद्यालय में प्रवेश नहीं हो पा रहा था, लेकिन आयोग के हस्तक्षेप से अब उनकी पढ़ाई दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
यह मामला समाचार पत्रों और प्राप्त आवेदन के माध्यम से आयोग के संज्ञान में आया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के निर्देश पर विशेष खंडपीठ (फास्ट ट्रैक कोर्ट) का गठन किया गया और मामले की त्वरित सुनवाई की गई।
सुनवाई के दौरान सामने आया कि दोनों बालिकाओं के पिता ने आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी, जबकि उनकी मां गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। परिवार की विषम परिस्थितियों के चलते मां अपनी बेटियों की पढ़ाई दूसरे स्थान पर जारी रखना चाहती थीं, लेकिन आवश्यक दस्तावेज नहीं मिलने के कारण दोनों बालिकाएं लगभग दो वर्षों से शिक्षा से वंचित थीं।
आयोग ने बच्चों के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित किया। आयोग की पहल पर संबंधित विद्यालय प्रबंधन ने दोनों छात्राओं की पूरी बकाया फीस माफ करने, परीक्षा परिणाम और स्थानांतरण प्रमाण-पत्र शीघ्र जारी करने पर सहमति दी।
इतना ही नहीं, छात्राओं की शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रहे, इसके लिए विद्यालय प्रबंधन ने स्वेच्छा से दोनों बालिकाओं को 21-21 हजार रुपये, यानी कुल 42 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी निर्णय लिया है।
आवेदिका ने आयोग के समक्ष इस समाधान पर संतोष व्यक्त किया, जिसके बाद आयोग ने प्रकरण का निराकरण कर उसे नस्तीबद्ध करने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि यह मामला 18 जून को आयोग में दर्ज हुआ था और 24 जून, यानी मात्र एक सप्ताह के भीतर, इसका समाधान कर दिया गया।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार की रक्षा और उनके सर्वोत्तम हितों का संरक्षण आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आयोग संवेदनशीलता, संवाद और त्वरित हस्तक्षेप के माध्यम से ऐसे मामलों का मानवीय एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
आवेदिका ने आयोग की त्वरित कार्रवाई और संवेदनशील हस्तक्षेप के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आयोग के प्रयासों से उनकी दोनों पुत्रियों की शिक्षा दोबारा शुरू हो सकेगी और उनका भविष्य सुरक्षित हो गया है।
