छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उम्रकैद कैदी को प्रोबेशन पर रिहा करने का दिया निर्देश, राज्य सरकार का आदेश निरस्त

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे एक कैदी की प्रोबेशन पर रिहाई से इनकार करने वाले राज्य सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने कैदी को छत्तीसगढ़ कैदी प्रोबेशन पर रिहाई अधिनियम, 1954 के प्रावधानों के तहत रिहा करने का निर्देश दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की खंडपीठ ने पारित किया।

अदालत ने कहा कि जेल अनुशासन से जुड़े पुराने मामलों को आधार बनाकर किसी कैदी की वर्तमान पात्रता को नकारा नहीं जा सकता। टिकरापारा निवासी मनोज अग्रवाल को वर्ष 2012 में हत्या और अवैध हथियार रखने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। उन्होंने अब तक लगभग 14 वर्ष 8 माह की सजा पूरी कर ली है।

इसके बाद उन्होंने प्रोबेशन पर रिहाई के लिए आवेदन किया था। राज्य प्रोबेशन बोर्ड ने 15 अप्रैल 2025 की बैठक में रिहाई की अनुशंसा नहीं की। बोर्ड ने कहा कि अपराध अमानवीय प्रकृति का है और जेल में रहते हुए तीन बार अनुशासनहीनता के मामले दर्ज हुए थे। इनमें बैरक से अनुपस्थित रहना और नकद राशि रखना शामिल था।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ जेल में अंतिम शिकायत वर्ष 2018 में दर्ज हुई थी जिसके लिए दंड भी दिया जा चुका है। उसके बाद से उनका आचरण संतोषजनक और नियमों के अनुरूप रहा है। अदालत ने माना कि इतने पुराने मामलों के आधार पर वर्तमान में रिहाई से इनकार करना न्यायसंगत नहीं है।

अदालत ने सक्षम प्राधिकारी की संतुष्टि और निर्धारित शर्तों के पालन के अधीन मनोज अग्रवाल को प्रोबेशन पर रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही राज्य सरकार के अस्वीकार वाले आदेश को निरस्त कर दिया गया है।

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