ED, EOW और ACB की कार्रवाई के बाद भी नहीं थम रहे आरोप: शराब दुकानों के संचालन को लेकर इनोवसोर्स पर गंभीर सवाल, अवैध वसूली और फर्जीवाड़े के आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग में प्रवर्तन निदेशालय (ED), आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई के बाद भी शराब दुकानों के संचालन को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। 1 अप्रैल 2026 से रायपुर, दुर्ग और बेमेतरा जिले की शराब दुकानों के संचालन का जिम्मा संभाल रही प्लेसमेंट एजेंसी इनोवसोर्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (Innovsource Services Pvt. Ltd.) पर अब कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

कार्यालय के संचालन पर उठे सवालप्राप्त जानकारी के अनुसार, कंपनी की गतिविधियां रायपुर के मौलश्री विहार, वीआईपी रोड स्थित एक कार्यालय से संचालित की जा रही हैं। आरोप है कि इस कार्यालय का वैध पंजीकरण दर्ज नहीं है तथा यह परिसर किसी अन्य कंपनी के नाम पर किराए पर लेकर संचालित किया जा रहा है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।

पूर्व शराब घोटाले से जुड़े लोगों के प्रभाव का आरोपसूत्रों के अनुसार, कार्यालय के संचालन में संस्कार सिंघानिया और अंकुर पालीवाल की सक्रिय भूमिका बताई जा रही है। आरोप है कि दोनों कंपनी के अधिकृत पदाधिकारी नहीं हैं, इसके बावजूद शराब दुकानों के संचालन और प्रशासनिक निर्णयों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। यह भी दावा किया गया है कि अंकुर पालीवाल को पूर्व में जांच एजेंसियों द्वारा नोटिस जारी किया जा चुका है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

भर्ती के नाम पर अवैध वसूली और ओवररेटिंग का आरोप

मामले में आरोप लगाया गया है कि शराब दुकानों में कर्मचारियों और सुपरवाइजरों की नियुक्ति के बदले प्रति कर्मचारी एक लाख रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। साथ ही, दुकानों में कार्यरत सेल्समैनों पर एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब बेचने का दबाव बनाए जाने का भी दावा किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक स्तर पर जिला आबकारी कार्यालय को भी इस प्रकार की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। हालांकि, विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।फर्जी पुलिस वेरिफिकेशन का भी आरोपकंपनी के जिला समन्वयक पर फर्जी पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि संबंधित थाना प्रभारी ने लिखित रूप से स्पष्ट किया है कि संबंधित व्यक्ति के नाम से कोई चरित्र प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया और प्रस्तुत दस्तावेज फर्जी है।

आरोप यह भी है कि शिकायत और एफआईआर दर्ज कराने की मांग के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। साथ ही जिला आबकारी अधिकारी पर भी शिकायत के बाद कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि शेष है।अधिकारियों के तबादले और इस्तीफे पर भी उठे सवालसूत्रों के अनुसार, हाल ही में कंपनी के जिला समन्वयक को हटाकर नए पदों का गठन किया गया। इसके कुछ समय बाद कंपनी के स्टेट हेड के इस्तीफे को भी लेकर चर्चाएं तेज हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि यह पूरी प्रक्रिया नए सिंडिकेट के गठन की तैयारी का हिस्सा हो सकती है। हालांकि, कंपनी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पहले भी सामने आ चुका है ओवररेटिंग का मामलाउल्लेखनीय है कि हाल ही में अभनपुर की एक शराब दुकान में डमी ग्राहक के माध्यम से जांच के दौरान एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब बेचने का मामला सामने आने पर आबकारी विभाग के एक उपनिरीक्षक को निलंबित किया गया था। ऐसे में नए आरोपों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।निष्पक्ष जांच की मांगमामले को लेकर शिकायतकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने इनोवसोर्स कंपनी के दस्तावेजों, कथित फर्जी पुलिस वेरिफिकेशन, भर्ती प्रक्रिया और अवैध वसूली के आरोपों की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

नोट: इस समाचार में उल्लिखित सभी आरोप शिकायतकर्ताओं और सूत्रों के दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इस संबंध में आबकारी विभाग और संबंधित कंपनी का पक्ष जानने का प्रयास किया जा रहा है। उनका पक्ष प्राप्त होते ही समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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