विश्व अस्थमा दिवस 2026: छत्तीसगढ़ में बढ़ता खतरा, इनहेलर की कमी बनी बड़ी चुनौती

रायपुर, 5 मई 2026। विश्व अस्थमा दिवस के मौके पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने छत्तीसगढ़ में बढ़ते अस्थमा के मामलों और इलाज की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इस वर्ष की थीम “अस्थमा से पीड़ित सभी लोगों के लिए एंटी-इन्फ्लेमेटरी इनहेलर्स की उपलब्धता” को राज्य के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है।

नारायणा एमएमआई अस्पताल, रायपुर के पल्मोनोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. दिपेश मास्के के अनुसार, अस्थमा एक आम लेकिन अक्सर अनदेखी की जाने वाली बीमारी है, जो सही इलाज के अभाव में गंभीर रूप ले सकती है।

छत्तीसगढ़ में क्यों बढ़ रहा है अस्थमा?
विशेषज्ञों के मुताबिक राज्य में अस्थमा के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण हैं:

तेजी से बढ़ता वायु प्रदूषण

ग्रामीण इलाकों में लकड़ी और कोयले के धुएं का इस्तेमाल

खनन क्षेत्रों में धूल और प्रदूषित वातावरण

कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े एलर्जन

इन कारणों से अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन बड़ी समस्या यह है कि कई मामलों में बीमारी का समय पर पता ही नहीं चल पाता।

इलाज की कमी बनी सबसे बड़ी समस्या
डॉ. मास्के ने बताया कि अस्थमा का इलाज संभव है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई चुनौतियां हैं:

मरीज केवल राहत देने वाली दवाओं पर निर्भर रहते हैं

इनहेलर को लेकर अब भी भ्रम और डर बना हुआ है

ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरी दवाओं की उपलब्धता नहीं

समय पर जांच और उपचार में देरी

उन्होंने कहा कि “समस्या बीमारी से ज्यादा उसके प्रबंधन में है।”

इनहेलर से बच सकती हैं जानें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एंटी-इन्फ्लेमेटरी इनहेलर अस्थमा नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका है।

नियमित उपयोग से अस्थमा के दौरे रोके जा सकते हैं

अस्पताल में भर्ती होने की संभावना कम होती है

मरीज सामान्य जीवन जी सकता है

इसके बावजूद, राज्य के कई हिस्सों में इनहेलर आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।

क्या करना होगा?
मरीज और परिवार:

खांसी, सांस फूलना और घरघराहट को नजरअंदाज न करें

दवाएं नियमित लें

इनहेलर का सही उपयोग करें

डॉक्टर:

केवल लक्षणों का इलाज नहीं, बल्कि दीर्घकालिक नियंत्रण पर ध्यान दें

सरकार:

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इनहेलर की उपलब्धता सुनिश्चित करे

स्वच्छ ईंधन और वायु प्रदूषण नियंत्रण पर काम करे

जागरूकता अभियान तेज करे

हर सांस की कीमत समझने की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि अस्थमा पूरी तरह नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी है, लेकिन सही समय पर इलाज न मिलने से यह जानलेवा बन सकती है।

विश्व अस्थमा दिवस पर यह संदेश साफ है कि किसी भी व्यक्ति को सिर्फ एक इनहेलर की कमी के कारण सांस लेने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।

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