8 जुलाई को रायपुर में होगी पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई को संगीतमय श्रद्धांजलि, लोक कलाकार देंगे भावपूर्ण प्रस्तुति

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने वाली पद्मविभूषण एवं डी.लिट. से सम्मानित पंडवानी की महान साधिका डॉ. तीजन बाई को 8 जुलाई को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह विशेष कार्यक्रम दोपहर 2 बजे महंत घासीदास संग्रहालय परिसर स्थित मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित होगा, जिसमें प्रदेश के प्रमुख जनप्रतिनिधि, कलाकार, साहित्यकार और कला प्रेमी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री सहित कई गणमान्य रहेंगे मौजूद

श्रद्धांजलि समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, मंत्रिपरिषद के सदस्य, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि, पद्मश्री एवं राज्य अलंकरण से सम्मानित कलाकार, साहित्यकार, संस्कृति कर्मी और प्रदेशभर से आए कला प्रेमी शामिल होंगे।

लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों से गूंजेगा मंच

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित लोक कलाकार गीत, संगीत, पंडवानी, लोकगायन और अन्य लोककलाओं की प्रस्तुतियों के माध्यम से डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक विरासत को नमन होगा, जिसे डॉ. तीजन बाई ने अपने जीवन की साधना से विश्व स्तर तक पहुंचाया।

पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान

5 जुलाई 2026 को डॉ. तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया के कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने पंडवानी जैसी लोकवाचिक परंपरा को गांव की चौपाल से उठाकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्वभर में स्थापित किया।

संघर्ष से सफलता तक का प्रेरक सफर

24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मीं डॉ. तीजन बाई ने बेहद साधारण परिस्थितियों में अपना जीवन शुरू किया। मात्र 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया और पंडवानी को ही जीवन का उद्देश्य बना लिया।

उस दौर में जब महिलाएं पारंपरिक वेदमती शैली में बैठकर पंडवानी प्रस्तुत करती थीं, तब उन्होंने साहस के साथ कपालिक शैली में खड़े होकर प्रस्तुति देकर नई परंपरा की शुरुआत की। उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय और जीवंत भावाभिव्यक्ति ने पंडवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

17 से अधिक देशों में बिखेरी भारतीय लोककला की चमक

प्रख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद डॉ. तीजन बाई ने 17 से अधिक देशों में पंडवानी की प्रस्तुतियां देकर भारतीय लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक दूत बन गईं।

अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित

लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया, जिनमें प्रमुख हैं—

  • पद्मश्री (1988)
  • संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995)
  • पद्मभूषण (2003)
  • फुकुओका पुरस्कार, जापान (2018)
  • पद्मविभूषण (2019)
  • डी.लिट. (मानद उपाधि)

सांस्कृतिक विरासत को नमन का अवसर

संस्कृति विभाग के अनुसार यह संगीतमय श्रद्धांजलि समारोह डॉ. तीजन बाई की कला साधना, संघर्ष और लोक संस्कृति के प्रति उनके अमूल्य योगदान को स्मरण करने का विशेष अवसर होगा। कार्यक्रम में लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उस महान विरासत को जीवंत करेंगे, जिसने पंडवानी को वैश्विक सम्मान दिलाया।

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