रायपुर में आबकारी विभाग का कथित ओवररेटिंग खेल! सेल्समैन पर कार्रवाई, सुपरवाइजर गुरु नारायण को क्यों मिली क्लीन चिट?

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त्योहारों के सीजन में शराब दुकानों पर फिर शुरू हुआ ओवररेटिंग का खेल, तय कीमत से अधिक वसूली के आरोप। स्टेशन रोड शराब दुकान में CCTV फुटेज में गड़बड़ी सामने आने के बाद कार्रवाई पर उठे सवाल।

रायपुर। त्योहारों का सीजन शुरू होते ही राजधानी रायपुर में शराब दुकानों पर ओवररेटिंग यानी निर्धारित कीमत से अधिक दर पर शराब बेचने की शिकायतें एक बार फिर सामने आने लगी हैं। आरोप है कि शहर की कई शराब दुकानों में ग्राहकों की जेब पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है। इतना ही नहीं, कुछ दुकानों में कथित तौर पर कोचियओं को भी तय मात्रा से अधिक और निर्धारित कीमत से ज्यादा दर पर शराब बेची जा रही है। इन गतिविधियों के बीच आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ताजा मामला राजधानी के स्टेशन रोड स्थित विदेशी मदिरा दुकान का है। मिली जानकारी के मुताबिक, देर शाम आबकारी विभाग की टीम ने दुकान में दबिश दी और वहां लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब बेचने यानी ओवररेटिंग की पुष्टि होने की बात सामने आई। इसके बाद आबकारी अधिकारी विक्रम ठाकुर की मौजूदगी में सेल्समैन के खिलाफ कार्रवाई की गई।

लेकिन इस पूरी कार्रवाई में सबसे बड़ा सवाल दुकान के सुपरवाइजर गुरु नारायण की भूमिका को लेकर खड़ा हो रहा है। आरोप है कि दुकान में ओवररेटिंग का यह खेल सुपरवाइजर के संरक्षण और विभागीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत से संचालित हो रहा था। इसके बावजूद कार्रवाई की जद में केवल सेल्समैन आया, जबकि कथित तौर पर पूरे मामले की जिम्मेदारी संभालने वाले सुपरवाइजर गुरु नारायण पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि इसी सुपरवाइजर के संरक्षण में पहले भी दुकान में ओवररेटिंग की गतिविधियां संचालित होती रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर CCTV फुटेज में ओवररेटिंग सामने आई, तो कार्रवाई केवल सेल्समैन तक ही क्यों सीमित रही? क्या दुकान के सुपरवाइजर की जिम्मेदारी तय नहीं होनी चाहिए? क्या विभागीय अधिकारियों को इस पूरे मामले की जानकारी नहीं थी?

सबसे बड़ा सवाल आबकारी अधिकारी विक्रम ठाकुर की कार्रवाई को लेकर है। आखिरकार सुपरवाइजर गुरु नारायण पर इतनी मेहरबानी क्यों? क्या विभाग इस मामले में निष्पक्ष जांच कर सुपरवाइजर की भूमिका सामने लाएगा या फिर छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर बड़े जिम्मेदारों को बचाने का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा?

अब सवाल सिर्फ ओवररेटिंग का नहीं, बल्कि आबकारी विभाग की जवाबदेही का भी है। जब सरकारी शराब दुकानों में ही निर्धारित कीमतों का पालन नहीं हो रहा, तो आम जनता को राहत कौन दिलाएगा? त्योहारों के नाम पर जनता की जेब पर पड़ रहे इस कथित बोझ पर विभाग के आला अधिकारी कब संज्ञान लेंगे?

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