बाल संरक्षण अभियान के तहत प्रदेशभर में जागरूकता, निरीक्षण और रेस्क्यू अभियान तेज
रायपुर। बच्चों को बाल श्रम, भिक्षावृत्ति, बाल विवाह और अन्य जोखिमपूर्ण परिस्थितियों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रदेशभर में विशेष बाल संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन-1098, श्रम विभाग, पुलिस विभाग तथा अन्य सहयोगी संस्थाओं की संयुक्त टीमों द्वारा व्यापक स्तर पर जागरूकता, निरीक्षण और बचाव कार्रवाई की जा रही है।
अभियान के अंतर्गत बस्तर, दुर्ग, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बालोद, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर, सुकमा, सारंगढ़-बिलाईगढ़, नारायणपुर, रायपुर और बेमेतरा सहित विभिन्न जिलों में बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाजार, होटल, ढाबा, कबाड़ी दुकान, गैरेज, निर्माण स्थल, ऑटो स्टैंड, फल-सब्जी मंडी, किराना दुकान तथा हार्डवेयर प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान बाल श्रम, भिक्षावृत्ति और असुरक्षित परिस्थितियों में रह रहे बच्चों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की गई। साथ ही दुकानदारों, प्रतिष्ठान संचालकों और आम नागरिकों को बाल अधिकारों, बाल संरक्षण कानूनों और बाल सक्षम नीति के प्रावधानों की जानकारी दी गई। जागरूकता के लिए पंपलेट और पोस्टर वितरित किए गए तथा बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने का संदेश दिया गया।
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में नौ बच्चों को विभिन्न प्रतिष्ठानों में कार्य करते हुए चिन्हित किया गया। संबंधित बच्चों और प्रतिष्ठान संचालकों को बाल श्रम निषेध कानूनों की जानकारी देकर आवश्यक समझाइश दी गई। वहीं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा क्षेत्र में भिक्षावृत्ति करते पाए गए दो नाबालिग बच्चों का रेस्क्यू कर उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, ताकि उनके संरक्षण और पुनर्वास की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में संभावित बाल विवाह की सूचना मिलने पर जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और बाल संरक्षण इकाई की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। दस्तावेजों के सत्यापन में दोनों पक्षों की आयु 19 वर्ष पाई गई। इसके बाद परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 के प्रावधानों की जानकारी देकर जागरूक किया गया।
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में नशा मुक्त भारत सप्ताह के अवसर पर बाल सक्षम नीति, बाल विवाह रोकथाम, बाल संरक्षण और चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 से संबंधित विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। वहीं नारायणपुर जिले के दूरस्थ ग्रामों में मिशन वात्सल्य के तहत संचालित बच्चों की सुरक्षा, देखरेख और पुनर्वास संबंधी योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाई गई।
अधिकारियों ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल बच्चों को जोखिमपूर्ण परिस्थितियों से बाहर निकालना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, परामर्श और पुनर्वास सेवाओं से जोड़कर सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि किसी बच्चे के साथ शोषण, बाल श्रम, भिक्षावृत्ति, उपेक्षा या किसी संकटपूर्ण स्थिति की जानकारी मिले तो तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अथवा आपातकालीन सेवा 112 पर सूचना दें।
