बिहान से बदली जिंदगी: खैरागढ़ की सुनीता वर्मा बनीं आत्मनिर्भर महिला उद्यमी, सालाना 4 लाख रुपये की आय
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ महिलाओं के जीवन में आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। विकासखंड खैरागढ़ के ग्राम टेकापारकला की निवासी श्रीमती सुनीता वर्मा इसका जीवंत उदाहरण हैं। कभी खेती और मजदूरी से परिवार का गुजारा करने वाली सुनीता आज सफल महिला उद्यमी बन चुकी हैं और विभिन्न व्यवसायों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।

2017 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद बदली जिंदगी
सुनीता वर्मा ने वर्ष 2017 में पद्म मां गायत्री स्व-सहायता समूह की सदस्यता ली। समूह से मिले पहले 5 हजार रुपये के ऋण से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और बैग सिलाई का कार्य शुरू किया। यही छोटा कदम आगे चलकर उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बना।
इसके बाद उन्हें 5 लाख रुपये का ऋण मिला, जिससे उन्होंने 48 डिसमिल कृषि भूमि और ट्रैक्टर खरीदा। बाद में 3 लाख रुपये के ऋण से ट्रॉली खरीदकर कृषि और परिवहन कार्य का विस्तार किया।
मसाला निर्माण और खाद्य उत्पादों से बढ़ी आय

आज सुनीता वर्मा हल्दी, धनिया और मिर्च जैसी मसाला फसलों की खेती करती हैं। वे स्वयं हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, मिर्च पाउडर, अचार, बड़ी और पापड़ तैयार कर उनकी पैकेजिंग एवं बिक्री करती हैं।
उनके उत्पाद सी-मार्ट, सरस मेला तथा विभिन्न राज्यों में आयोजित क्षेत्रीय मेलों में भी बिकते हैं। इस व्यवसाय से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त होती है।
सात एकड़ में खेती से डेढ़ लाख रुपये का लाभ
सुनीता वर्तमान में लगभग 7 एकड़ भूमि किराये पर लेकर धान, गेहूं, चना, अरहर, मूंग, उड़द और विभिन्न सब्जियों की खेती कर रही हैं। आधुनिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से उन्हें खेती से प्रतिवर्ष लगभग 1.5 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है।
ई-रिक्शा और सब्जी नर्सरी से अतिरिक्त कमाई
पिछले तीन वर्षों से वे ई-रिक्शा संचालन से भी जुड़ी हैं, जिससे उन्हें नियमित अतिरिक्त आय मिल रही है।
वर्ष 2025 से उन्होंने सब्जी नर्सरी तैयार करने का कार्य भी शुरू किया, जिससे उन्हें हर वर्ष लगभग 1 लाख रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है।
दुकान और CSC सेंटर का भी संचालन
सुनीता वर्मा ने खैरागढ़-छुईखदान मुख्य मार्ग पर अपना पक्का मकान एवं दुकान भी स्थापित किया है। यहां वे अपने स्वयं निर्मित मसाले, अचार, बड़ी और पापड़ बेचती हैं। साथ ही कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) का संचालन कर ग्रामीणों को विभिन्न डिजिटल सेवाएं भी उपलब्ध करा रही हैं।
महिला सशक्तिकरण की बनीं मिसाल
आज सुनीता वर्मा अपने गांव ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। वे अन्य महिलाओं को स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। भविष्य में वे पशुपालन व्यवसाय शुरू कर अपने उद्यम का और विस्तार करने की योजना बना रही हैं।
बिहान योजना, स्वयं सहायता समूह और अपनी मेहनत के दम पर सुनीता वर्मा ने यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन, आर्थिक सहयोग और दृढ़ संकल्प से ग्रामीण महिलाएं भी सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं।
