राज्यपाल रमेन डेका ने नवाचार और एआई को बताया भविष्य की ताकत, मियाजाकी आम की खेती को भी सराहा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक युग की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो चिकित्सा, कृषि, शिक्षा और अर्थव्यवस्था सहित अनेक क्षेत्रों में मानव की सहायक बन सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई कभी भी मानव बुद्धि, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का स्थान नहीं ले सकती। तकनीक को जीवन को बेहतर बनाने के साधन के रूप में अपनाया जाना चाहिए, न कि उसे खतरे के रूप में देखा जाना चाहिए।
राज्यपाल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों का उपयोग नवाचार, उद्यमिता और समाज हित के कार्यों में करें। उन्होंने इंटरनेट के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि इसके सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ नकारात्मक पहलुओं को भी समझना आवश्यक है और डिजिटल एडिक्शन से बचने के प्रयास किए जाने चाहिए।
नवाचार और विज्ञान से होगा भविष्य का निर्माण
राज्यपाल ने कहा कि मानव सभ्यता का विकास सदैव वैज्ञानिक खोजों और नवाचारों के माध्यम से हुआ है। जिस प्रकार अग्नि की खोज ने मानव जीवन को नई दिशा दी थी, उसी प्रकार आधुनिक तकनीक और विज्ञान भविष्य के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास में तकनीक आधारित समाधान विकसित करने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि स्टार्टअप और नवाचार केवल आर्थिक विकास के साधन नहीं हैं, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम भी हैं। नवाचारों के जरिए दिव्यांगजनों का जीवन आसान बनाया जा सकता है, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं और समाज को नई संभावनाओं से जोड़ा जा सकता है।
गांवों तक पहुंचे तकनीक का लाभ
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपार संभावनाओं और समृद्ध आदिवासी संस्कृति वाला राज्य है। यहां के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और अवसरों से जोड़ने की है। उन्होंने कहा कि भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
एआई कौशल रथ को दिखाई हरी झंडी
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा जेनरेटिव एआई की जानकारी देगी। विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं को निःशुल्क व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस अवसर पर राज्यपाल ने आईसेक्ट के वार्षिक प्रतिवेदन, कौशल रथ और एआई आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया।
मियाजाकी आम की खेती को बताया अवसर
लोकभवन में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में जगदलपुर के ट्री मैन संपत झा ने राज्यपाल को दुनिया की सबसे महंगी आम प्रजातियों में शामिल मियाजाकी आम भेंट किया। राज्यपाल ने बस्तर क्षेत्र में मियाजाकी आम की खेती को बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय फल बाजार में नई पहचान दिला सकती है।
उन्होंने इस विशेष प्रजाति की खेती को बढ़ावा देने, उत्पादन बढ़ाने और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी प्रभावी मार्केटिंग के प्रयास करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार घोष, पद्मश्री अजय मांडवी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, बैंक अधिकारी, शिक्षाविद और बड़ी संख्या में ग्रामीण उद्यमी उपस्थित रहे।

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