नक्सलवाद छोड़ मुख्यधारा में लौटे कमलू राम, सरकारी योजनाओं से मिला पक्का घर और सम्मानजनक जीवन

नारायणपुर। हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे कमलू राम नुरेटी आज बदलाव और पुनर्वास की मिसाल बन गए हैं। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोहकामेटा निवासी कमलू राम ने वर्ष 2013 में नक्सल संगठन का साथ छोड़ आत्मसमर्पण किया था। आज वे न केवल सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं, बल्कि अन्य युवाओं को भी हिंसा छोड़कर विकास की राह अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

आत्मसमर्पण के बाद बदली जिंदगी

आत्मसमर्पण के बाद कमलू राम ने समाजहित को प्राथमिकता देते हुए नक्सल प्रभावित युवाओं को भी मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उनके सकारात्मक योगदान को देखते हुए राज्य सरकार ने पुनर्वास योजनाओं का लाभ प्रदान किया, जिससे उनका वर्षों पुराना पक्का घर बनाने का सपना पूरा हो सका।

सरकारी योजनाओं से मिला अपना घर

जिला प्रशासन ने वर्ष 2024-25 में विशेष परियोजना के तहत आत्मसमर्पित नक्सल पीड़ित योजना के अंतर्गत सर्वेक्षण कर प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना से 1.20 लाख रुपये की लागत वाला पक्का आवास स्वीकृत किया।

आवास निर्माण के दौरान उन्हें मनरेगा के माध्यम से 23,490 रुपये की मजदूरी भी प्रदान की गई, जिससे निर्माण कार्य में आर्थिक सहायता मिली। इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय और सौभाग्य योजना के तहत बिजली कनेक्शन भी उपलब्ध कराया गया।

अब मिला सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन

कमलू राम नुरेटी ने बताया कि पहले उनका परिवार किराये के मकान में रहता था, जहां रोज नई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब अपना पक्का घर, बिजली और शौचालय मिलने से पूरा परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहा है।

पुनर्वास योजनाएं बन रहीं बदलाव का आधार

जिला प्रशासन के अनुसार आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए संचालित योजनाएं सकारात्मक परिणाम दे रही हैं। कमलू राम की कहानी इस बात का उदाहरण है कि शासन की योजनाओं और समाज के सहयोग से भटके हुए लोगों को नई दिशा देकर उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान किया जा सकता है।

यह पहल बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और विश्वास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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