आपातकाल लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय, नई पीढ़ी को इससे सीख लेनी चाहिए: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रविवार को राजधानी रायपुर स्थित डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष पर आधारित स्मारिका “आपातकाल के योद्धा” का विमोचन किया तथा राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। लोकतंत्र सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान ने देश में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त किया।
लोकतंत्र केवल व्यवस्था नहीं, जीवन का मूल्य है : इंद्रेश कुमार
समारोह के मुख्य वक्ता इंद्रेश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं बल्कि जीवन जीने का एक मूल्य है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों पर गंभीर प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन लोकतंत्र सेनानियों ने जेल और यातनाओं के बावजूद लोकतांत्रिक आदर्शों को जीवित रखा।
उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता, अनुशासन और स्वच्छता को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि “राष्ट्र प्रथम” की भावना ही भारत की वास्तविक शक्ति है।

लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को किया याद
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे कार्यक्रम केवल इतिहास को याद करने के लिए नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को लोकतंत्र और स्वतंत्रता की कीमत समझाने के लिए भी आवश्यक हैं।
उन्होंने अपने पारिवारिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि साय आपातकाल के दौरान 19 महीने तक जेल में रहे। उस कठिन दौर में लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों को भारी आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक भेष बदलकर ऐसे परिवारों तक भोजन और आवश्यक सामग्री पहुंचाते थे ताकि कोई भूखा न रहे।
लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि वर्ष 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था। प्रेस सेंसरशिप, मौलिक अधिकारों के निलंबन और संविधान संशोधनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह दौर लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव सजग रहने की सीख देता है।
निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को मिला सम्मान
कार्यक्रम के दौरान आपातकाल स्मृति दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में प्रदेशभर से 540 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।
विद्यालय स्तर पर:
- प्रथम: जागृति जांगड़े (जे.आर. दानी गर्ल्स स्कूल, रायपुर) – ₹31,000 एवं स्मृति चिन्ह
- द्वितीय: सूरज तांडिया (विवेकानंद विद्यापीठ, कोरबा)
- तृतीय: अंश देशमुख (अग्रसेन इंटरनेशनल स्कूल, दुर्ग)
महाविद्यालय स्तर पर:
- प्रथम: कल्याणी पटले (रायपुर)
- द्वितीय: सीमा साव (रायगढ़)
- तृतीय: खुशबू (दुर्ग)
मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को स्मृति चिन्ह एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान करते हुए लोकतंत्र और संविधान के प्रति युवाओं की जागरूकता की सराहना की।
अनेक गणमान्य अतिथि रहे उपस्थित
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी, विधायक मोतीलाल साहू, गोमती साय, डॉ. रामप्रताप सिंह, संजय श्रीवास्तव, दीपक म्हस्के, वर्णिका शर्मा, अजय रामदास, दिवाकर तिवारी, सच्चिदानंद उपासने सहित लोकतंत्र सेनानी, उनके परिजन और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
