योग: स्वस्थ जीवन की भारतीय विरासत, विश्व कल्याण का मार्ग

रायपुर। भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, स्वस्थ और सार्थक बनाने की एक समग्र पद्धति माना गया है। हजारों वर्षों से ऋषि-मुनियों और संतों ने योग के माध्यम से शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने का संदेश दिया है। आज यही भारतीय विरासत विश्वभर में स्वास्थ्य और कल्याण का प्रतीक बन चुकी है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पहल पर वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की। इसके बाद योग एक वैश्विक जनआंदोलन बन गया और दुनिया के करोड़ों लोग इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना चुके हैं।
वर्ष 2026 के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम “Yoga for Healthy Ageing” (स्वस्थ एवं सक्रिय वृद्धावस्था के लिए योग) निर्धारित की गई है। यह विषय इस बात पर बल देता है कि योग जीवन के हर चरण में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का प्रभावी माध्यम है। नियमित योगाभ्यास न केवल बीमारियों से बचाव करता है, बल्कि सक्रिय और सकारात्मक जीवनशैली की नींव भी रखता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है। उनका मानना है कि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ परिवार, सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला होता है। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का राष्ट्रीय मुख्य आयोजन कोलकाता में होगा, जहां प्रधानमंत्री स्वयं योगाभ्यास का नेतृत्व करेंगे।
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य स्तरीय मुख्य समारोह अंबिकापुर में आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री स्वयं योग कार्यक्रम में शामिल होकर प्रदेशवासियों को योग अपनाने और स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने का संदेश देंगे। राज्य सरकार विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक अभियान चला रही है।
मुख्यमंत्री साय का मानना है कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं। योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को भी मजबूत करता है। इसी कारण राज्य सरकार स्वास्थ्य संवर्धन और जनजागरूकता कार्यक्रमों में योग को विशेष प्राथमिकता दे रही है।
प्राकृतिक संसाधनों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ में योग का संदेश लोगों के जीवन से सहज रूप से जुड़ता है। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की प्रकृति-आधारित जीवनशैली योग के मूल सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करती है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और विभिन्न शासकीय संस्थानों में नियमित योग गतिविधियों के माध्यम से स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ते तनाव और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच योग एक सरल, सुलभ और प्रभावी समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है। नियमित योगाभ्यास शरीर को निरोग, मन को शांत और जीवन को संतुलित बनाता है। यह व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करता है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने का संकल्प है। आइए, योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर स्वस्थ छत्तीसगढ़, विकसित भारत और समृद्ध विश्व के निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।

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