बिहान से बदली तस्वीर: ननकट्ठी की विद्यावती बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल, महिलाओं को दिखाया ‘लखपति दीदी’ बनने का रास्ता
रायपुर/जिला संवाददाता। दृढ़ संकल्प, सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं भी सफलता की नई इबारत लिख सकती हैं। इसका जीवंत उदाहरण हैं जिले के ग्राम पंचायत ननकट्ठी की विद्यावती चौधरी, जिन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर न केवल अपना जीवन संवारा, बल्कि गांव की दर्जनों महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की राह दिखाई।
आराध्या स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष और एफएलसीआरपी के रूप में कार्यरत विद्यावती चौधरी ने समूह की बचत और ऋण राशि का उपयोग करते हुए चावल पापड़ निर्माण एवं सिलाई केंद्र की शुरुआत की। शुरुआत भले ही छोटे स्तर पर हुई, लेकिन महिलाओं की मेहनत, लगन और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता ने इस प्रयास को एक सफल उद्यम में बदल दिया।
घर-आंगन से बाजार तक पहुंचा स्वाद
समूह की महिलाएं प्रतिदिन एकत्रित होकर चावल पापड़ तैयार करती हैं। बेहतर गुणवत्ता और सामूहिक श्रम का परिणाम यह रहा कि उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती गई। आज ननकट्ठी के पापड़ स्थानीय बाजारों में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं और समूह हर महीने हजारों रुपये का कारोबार कर रहा है।
आर्थिक मजबूती के साथ बढ़ा आत्मविश्वास
इस उद्यम से जुड़ी महिलाओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। नियमित आय मिलने से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों को पूरा करना आसान हुआ है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अब अपने निर्णय स्वयं लेने लगी हैं।
महिला सशक्तिकरण की नई पहचान बनीं विद्यावती
विद्यावती चौधरी की सफलता केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की प्रेरक कहानी है। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और सही दिशा मिले तो वे सामूहिक शक्ति के बल पर बड़े बदलाव ला सकती हैं।
आज ननकट्ठी की महिलाएं अपने उत्पादों के साथ गर्व से खड़ी हैं और गांव में आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुकी हैं। बिहान योजना, स्व-सहायता समूहों की ताकत और सामूहिक मेहनत के दम पर ग्रामीण महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनने का सपना साकार कर रही हैं।
