संकट की घड़ी में बना सहारा: सुकमा में 474 परिवारों को मिली तत्काल राहत, 69 लाख से अधिक की सहायता राशि वितरित
सुकमा। भीषण आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली से प्रभावित सुकमा जिले में प्रशासन ने संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई का परिचय देते हुए राहत एवं पुनर्वास कार्यों को युद्धस्तर पर अंजाम दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुसार तथा प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर जिला प्रशासन ने प्रभावित परिवारों तक तत्काल सहायता पहुंचाकर भरोसे की मिसाल पेश की है।
आपदा की सूचना मिलते ही कलेक्टर अमित कुमार के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। राहत एवं बचाव दलों ने प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और जरूरतमंद परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई।
474 हितग्राहियों को मिली 69 लाख रुपये से अधिक की राहत
राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के तहत चलाए गए विशेष अभियान में जिले के 474 प्रभावित परिवारों को कुल 69 लाख 32 हजार 700 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। सबसे अधिक प्रभावित तोंगपाल क्षेत्र के परिवारों को प्राथमिकता देते हुए लगभग 36 लाख रुपये की राहत राशि वितरित की गई, जिससे पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिली।
हर पीड़ित तक पहुंचा प्रशासन
प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार गांवों का दौरा कर प्रभावित लोगों की समस्याओं को सुना और जनहानि तथा पशुधन हानि से प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति राहत से वंचित न रहे। प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया गया कि शासन और प्रशासन हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है।
1,407 क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण की तैयारी
आंधी-तूफान से जिले में 1,407 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रशासन ने क्षति का विस्तृत सर्वेक्षण कर मरम्मत और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही लगभग 2.5 करोड़ रुपये मूल्य की सार्वजनिक संपत्तियों के सुधार और पुनर्बहाली के लिए भी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
तेजी से पटरी पर लौट रहा जनजीवन
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई, सतत निगरानी और मानवीय दृष्टिकोण के चलते प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन तेजी से सामान्य हो रहा है। राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि प्रभावित परिवार जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौट सकें।
सुकमा जिला प्रशासन की यह पहल साबित करती है कि आपदा की कठिन परिस्थितियों में संवेदनशील शासन, त्वरित राहत व्यवस्था और मानवीय दृष्टिकोण ही लोगों के लिए सबसे बड़ा संबल बनते हैं।
