बाल विवाह पर प्रशासन की सख्ती: कुसमी के कोरंधा गांव में नाबालिग बालिका का विवाह रुकवाया गया
बलरामपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे अभियान को बलरामपुर जिले में बड़ी सफलता मिली है। विकासखंड कुसमी के ग्राम पंचायत कोरंधा में एक नाबालिग बालिका का बाल विवाह समय रहते रुकवाकर प्रशासन ने उसके सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
सूचना मिलते ही हरकत में आई संयुक्त टीम
जानकारी के अनुसार क्षेत्र में एक नाबालिग बालिका के विवाह की तैयारी किए जाने की सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम तत्काल मौके पर पहुंची। जांच के दौरान पाया गया कि विवाह के लिए तय किए गए बालक और बालिका दोनों की आयु वैधानिक विवाह आयु से कम थी।
परिजनों को समझाए कानूनी और सामाजिक दुष्परिणाम
अधिकारियों ने परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बाल विवाह के कानूनी, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों से अवगत कराया। टीम ने बताया कि कम उम्र में विवाह बच्चों की शिक्षा, मानसिक विकास और सामाजिक प्रगति को प्रभावित करता है। विशेष रूप से बालिकाओं के लिए अल्पायु में मातृत्व गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।
समझाइश के बाद परिजनों ने टाला विवाह
प्रशासन की समझाइश के बाद परिजनों ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए विवाह को स्थगित करने और बच्चों की निर्धारित वैधानिक आयु पूरी होने के बाद ही विवाह संपन्न कराने की सहमति दी। अधिकारियों ने इस कदम को बाल अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता बताया।
जागरूकता अभियान से बदल रही सोच
राज्य सरकार बाल विवाह की रोकथाम के लिए जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता पर विशेष जोर दे रही है। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, ग्राम सभाओं और विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही समाज को बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
बाल विवाह की सूचना तुरंत दें
महिला एवं बाल विकास विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की आशंका या सूचना मिले तो इसकी जानकारी तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या स्थानीय प्रशासन को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर बच्चों के अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
