IGKV Paper Leak Case: कृषि विश्वविद्यालय पेपर लीक मामले में 6 गिरफ्तार, WhatsApp पर वायरल हुआ था प्रश्नपत्र

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में पेपर लीक मामले में रायपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, सभी गिरफ्तारियां दुर्ग और आसपास के इलाकों से की गई हैं।

मामला ‘Pest Management in Crop and Stored Grains-I’ विषय की परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा से पहले इस विषय का प्रश्नपत्र सोशल मीडिया और WhatsApp के जरिए वायरल हो गया था। परीक्षा के दौरान छात्रों को वही प्रश्नपत्र मिला, जो पहले से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था।

परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था पेपर

जानकारी के मुताबिक, ‘Pest Management in Crop and Stored Grains-I’ का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही WhatsApp और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गया था।

जब विद्यार्थी परीक्षा देने पहुंचे तो उन्हें वही प्रश्नपत्र दिया गया, जो परीक्षा से पहले वायरल हो चुका था। इसके बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था और प्रश्नपत्र की गोपनीयता को लेकर सवाल उठने लगे।

6 लोगों की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप

मामले की गंभीरता को देखते हुए रायपुर पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के बाद पुलिस ने दुर्ग और आसपास के क्षेत्र से 6 लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र किस स्तर से बाहर आया, इसे किसने वायरल किया और इस पूरे मामले में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।

NSUI ने किया विश्वविद्यालय का घेराव

पेपर लीक मामले को लेकर शुक्रवार को NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं और छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

NSUI ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का घेराव किया।

CM साय ने दिए थे सख्त जांच के निर्देश

मामले को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कहा था कि प्रदेश में परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा था कि परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने या विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था।

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