रायपुर: छत्तीसगढ़ के खजाने को भरने वाले आबकारी विभाग पर इन दिनों काले बादलों का साया है। प्रदेश में लंबे समय से यह सवाल उठ रहा था कि आखिर किसकी शह पर शराब दुकानों में खुलेआम ओवररेटिंग का खेल चल रहा है? शासन द्वारा तय की गई दरों को दरकिनार कर आम जनता की जेब पर डाका डालने की इजाजत आखिरकार कौन देता है?
अब इस बड़े सवाल का जवाब एक वायरल ऑडियो के जरिए सामने आ चुका है, जिसने विभाग के आला अधिकारियों की नींद उड़ा दी है।
ऑडियो में बड़ा खुलासा: "साहब के इशारे पर हो रही ओवररेटिंग"
हाल ही में सामने आए एक एक्सक्लूसिव ऑडियो में राजधानी रायपुर के टिकरापारा शराब दुकान के सुपरवाइजर राहुल की आवाज सुनी जा सकती है। इस बातचीत के दौरान सुपरवाइजर राहुल ने खुद यह कबूल किया है कि शराब की दुकानों में ओवररेटिंग का यह खेल किसी निचले कर्मचारी का मनमर्जियां नहीं, बल्कि ऊपर से मिला हुक्म है।
वायरल ऑडियो का मुख्य अंश: सुपरवाइजर राहुल ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि उनके एरिया के आबकारी ADO (सहायक जिला आबकारी अधिकारी) विक्रम ठाकुर द्वारा ही तय दर से अधिक कीमत पर शराब बेचने की ‘परमिशन’ दी जाती है।
विभागीय साख पर उठे गंभीर सवाल...
इस ऑडियो के वायरल होने के बाद आबकारी महकमे में खलबली मच गई है। जिस अधिकारी के कंधों पर ओवररेटिंग रोकने और अवैध बिक्री पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी है, अगर वही इस खेल की अनुमति दे रहा हो, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जनता की जेब पर डाका: तय मूल्य से 10 से 50 रुपये तक ज्यादा वसूल कर रोजाना लाखों रुपये का ‘ऊपरी खेल’ जारी है।
अधिकारियों की सरपरस्ती: सुपरवाइजर के इस बयान ने साफ कर दिया है कि नीचे से लेकर ऊपर तक सिस्टम में इस गैर-कानूनी वसूली की जड़ें कितनी गहरी हैं।
पारदर्शिता पर दाग: शासन के राजस्व दावों के बीच इस तरह के गिरोहबाज़ी वाले ऑडियो आबकारी विभाग की साख को पूरी तरह धूमिल कर रहे हैं।
आगे क्या?
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अब गेंद आबकारी आयुक्त और शासन के पाले में है। क्या मामले की जांच कराकर दोषी ADO विक्रम ठाकुर और संबंधित सुपरवाइजर पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? आम जनता और मीडिया की नजरें अब विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं।