सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार अनिवार्य करने की याचिका खारिज, बिलासपुर हाईकोर्ट बोला- आदेश लागू होगा तभी होगी सुनवाई
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार को अनिवार्य किए जाने की आशंका को लेकर दायर जनहित याचिका को बिलासपुर हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हालांकि अदालत ने साफ किया कि यदि भविष्य में राज्य सरकार इस संबंध में कोई आदेश लागू करती है और उससे किसी के संवैधानिक अधिकार प्रभावित होते हैं, तो याचिकाकर्ता नई याचिका दायर कर सकते हैं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि फिलहाल प्रदेश के किसी भी सरकारी स्कूल में मंत्रोच्चार को अनिवार्य करने संबंधी कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर न तो कोई प्रभावी नीति लागू है और न ही कोई आधिकारिक निर्देश जारी किए गए हैं।
यह जनहित याचिका पूर्व वक़्फ़ बोर्ड अध्यक्ष समेत अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आशंका जताई गई थी कि यदि सरकारी स्कूलों में किसी विशेष धार्मिक मंत्र का अनिवार्य पाठ कराया जाता है, तो यह संविधान के अनुच्छेद 28 का उल्लंघन होगा। अनुच्छेद 28 सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े प्रावधानों को निर्धारित करता है।
राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि वर्तमान में ऐसा कोई आदेश या व्यवस्था अस्तित्व में नहीं है, इसलिए इस स्तर पर न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं बनती। अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए यह स्वतंत्रता भी दी कि यदि भविष्य में मंत्रोच्चार को अनिवार्य किए जाने का कोई आदेश लागू होता है, तो प्रभावित पक्ष दोबारा अदालत का रुख कर सकता है।
चूंकि सरकार ने स्पष्ट रूप से बताया कि फिलहाल ऐसी कोई व्यवस्था लागू नहीं है, इसलिए हाईकोर्ट ने मामले में किसी भी प्रकार की अंतरिम या अंतिम रोक लगाने की आवश्यकता नहीं समझी।
