राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान: छत्तीसगढ़ में 35.98 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी पोलियो की दो बूंद, स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार
रायपुर। देशभर में रविवार को आयोजित होने वाले राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के लिए छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बार राज्य में जन्म से पांच वर्ष तक के 35 लाख 98 हजार 904 बच्चों को पोलियो से बचाव के लिए दवा की दो बूंद पिलाई जाएगी। अभियान के सफल संचालन के लिए 28,791 टीमें और 57 हजार से अधिक वैक्सीनेटर तैनात किए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभियान के पहले दिन पोलियो बूथों पर बच्चों को दवा पिलाई जाएगी, जबकि 29 और 30 जून को स्वास्थ्य टीमें घर-घर पहुंचकर उन बच्चों को भी पोलियो की खुराक देंगी, जो किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच पाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी बच्चा पोलियो की दवा से वंचित न रहे।
अभियान की तैयारियों के तहत राज्य के सभी 33 जिलों में जिला और विकासखंड स्तर पर टास्क फोर्स की बैठकें आयोजित कर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, पर्यवेक्षकों और टीकाकरण दलों का प्रशिक्षण पूरा कर लिया गया है। साथ ही माइक्रोप्लान का सत्यापन, वैक्सीन की उपलब्धता, कोल्ड चेन प्रबंधन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है।
इस बार विशेष फोकस दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों, वनांचलों, शहरी बस्तियों, ईंट-भट्ठों, निर्माण स्थलों तथा प्रवासी और घुमंतू परिवारों के बच्चों तक पहुंच बनाने पर रहेगा। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करेंगी कि प्रत्येक पात्र बच्चे को पोलियो की दवा मिल सके।
राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. वी.आर. भगत ने बताया कि अभियान की सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को निर्धारित पोलियो बूथों तक अवश्य लेकर आएं। यदि किसी कारण से बूथ तक नहीं पहुंच पाते हैं, तो घर पहुंचने वाली स्वास्थ्य टीम का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि पोलियो मुक्त भारत की उपलब्धि को बनाए रखने में प्रत्येक परिवार की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जन्म से पांच वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को, चाहे उसे पहले नियमित टीकाकरण या किसी पूर्व पल्स पोलियो अभियान में दवा मिल चुकी हो, इस अभियान में भी पोलियो की दो बूंद अवश्य पिलाई जानी चाहिए। यही सतर्कता भारत को स्थायी रूप से पोलियो मुक्त बनाए रखने की सबसे बड़ी गारंटी है।
