80% दिव्यांगता भी नहीं रोक सकी हौसलों की उड़ान: मोटराइज्ड ट्रायसायकल बनी सूरज के सपनों की नई रफ्तार

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। कहते हैं कि यदि इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। गौरेला विकासखंड के ग्राम बस्ती निवासी सूरज कुमार वाकरे ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से इस बात को सच साबित कर दिखाया है। 80 प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों और शिक्षा के रास्ते में हार नहीं मानी।

वर्तमान में सूरज डॉ. भंवर सिंह पोर्ते महाविद्यालय, पेंड्रा में बी.ए. अंतिम वर्ष के छात्र हैं। शारीरिक चुनौतियों और सीमित परिवहन सुविधाओं के कारण उन्हें रोजाना कॉलेज आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कई बार इन कठिनाइयों का असर उनकी पढ़ाई और दैनिक जीवन पर भी पड़ता था, लेकिन सूरज ने परिस्थितियों के आगे झुकने के बजाय लगातार आगे बढ़ने का संकल्प बनाए रखा।

सुशासन तिहार बना जीवन में बदलाव का माध्यम

सूरज के संघर्ष और जरूरत को समझते हुए सुशासन तिहार के अंतर्गत लमना में आयोजित शिविर में समाज कल्याण विभाग द्वारा उन्हें मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्रदान की गई। यह सहायता उनके जीवन में किसी नई उम्मीद से कम नहीं रही।

मोटराइज्ड ट्रायसायकल मिलने के बाद अब सूरज के लिए कॉलेज पहुंचना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है। वे अपने दैनिक कार्यों को भी आत्मनिर्भरता के साथ पूरा कर पा रहे हैं। समय की बचत होने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

“अब मैं अपने सपनों की ओर और तेजी से बढ़ रहा हूं”

सूरज बताते हैं कि पहले उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब वे स्वतंत्र रूप से अपनी पढ़ाई जारी रख पा रहे हैं। उनका सपना है कि उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज में अपनी अलग पहचान बनाएं और अन्य दिव्यांग युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनें।

जनकल्याणकारी योजनाओं से बदल रही जिंदगी

सूरज कुमार वाकरे की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि शासन की जनहितकारी योजनाएं जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रदत्त मोटराइज्ड ट्रायसायकल ने न केवल उनकी गतिशीलता बढ़ाई है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की दिशा में नई राह भी दिखाई है।

भावुक होकर सूरज कहते हैं कि यह सहायता उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने शासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें अपने सपनों को साकार करने का नया विश्वास और नई ऊर्जा मिली है।

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