सुकमा की बेटियों का कमाल: नेशनल ट्राइबल गेम्स में जीता गोल्ड, छत्तीसगढ़ को दिलाया गौरव

सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुदूर आदिवासी अंचल सुकमा की दो बेटियों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय मंच पर इतिहास रच दिया है। शारदा प्रधानी और पूजा माड़वी ने पहले खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स की महिला फुटबॉल प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए छत्तीसगढ़ को स्वर्ण पदक दिलाया है।

राजधानी रायपुर में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में छत्तीसगढ़ की टीम ने झारखंड को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत में सुकमा की दोनों खिलाड़ियों की भूमिका बेहद अहम रही।

दूरस्थ गांवों से राष्ट्रीय मंच तक का सफर

ग्राम चिपुरपाल की शारदा प्रधानी और कोंटा के कोलईगुड़ा की पूजा माड़वी आज प्रदेश की नई खेल प्रेरणा बन चुकी हैं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद दोनों खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा से साबित कर दिया कि जुनून और मेहनत के सामने कोई बाधा बड़ी नहीं होती।

सेमीफाइनल में अरुणाचल को हराया, फाइनल में झारखंड को दी मात

छत्तीसगढ़ की महिला फुटबॉल टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। टीम ने पहले सेमीफाइनल में अरुणाचल प्रदेश को हराया और फिर रोमांचक फाइनल मुकाबले में झारखंड को पराजित कर स्वर्ण पदक जीत लिया।

इस सफलता के पीछे खेलो इंडिया फुटबॉल कोच शिवेंद्र ठाकुर का महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है, जिन्होंने खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान किया।

आवासीय खेल अकादमी में ले रही हैं प्रशिक्षण

शारदा और पूजा वर्तमान में आवासीय खेल अकादमी रायपुर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उनकी उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सरकार की खेल योजनाएं और उचित प्रशिक्षण ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कलेक्टर ने किया सम्मान, मिलेगी आर्थिक सहायता

स्वर्ण पदक जीतने के बाद दोनों खिलाड़ियों ने कलेक्टर अमित कुमार से मुलाकात की। कलेक्टर ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और विवेकानंद युवा प्रोत्साहन योजना के तहत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।

यह सहायता खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और आगामी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी में मदद करेगी।

युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा

सुकमा जैसे दूरस्थ जिले से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना न केवल शारदा और पूजा की व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। उनकी यह उपलब्धि प्रदेश के हजारों युवा खिलाड़ियों, विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।

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