सीबीएसई मान्यता विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, स्कूल शिक्षा सचिव से मांगा जवाब

बिलासपुर। शहर के निजी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम की मान्यता का हवाला देकर प्रवेश देने और बाद में राज्य बोर्ड की परीक्षा दोबारा लेने के मामले को लेकर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ में शिक्षा के अधिकार से जुड़े प्रकरण की सुनवाई के दौरान इस मुद्दे को उठाया गया।

मामले में हाईकोर्ट ने अभिभावकों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए स्कूल शिक्षा सचिव से नए शपथपत्र के माध्यम से जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। भिलाई निवासी सीवी भगवंत ने शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं देने और स्कूलों की मनमानी के खिलाफ याचिका दायर की है।

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने शहर के ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल और नारायणा टेक्नो स्कूल से जुड़े विवाद को अदालत के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि इन स्कूलों ने अभिभावकों को सीबीएसई पाठ्यक्रम का भरोसा देकर बच्चों का प्रवेश लिया, जबकि बाद में राज्य शासन के निर्देश का हवाला देकर 5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षा दोबारा देने के लिए कहा गया।

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की परीक्षाएं फरवरी से मार्च के पहले सप्ताह तक पहले ही आयोजित की जा चुकी थीं। इसके बाद अचानक एक दिन पहले सूचना देकर राज्य बोर्ड की परीक्षा में शामिल होने के लिए कहा गया, जिससे वे आक्रोशित हो गए। विरोध स्वरूप अभिभावकों ने कलेक्टर बंगले का घेराव भी किया, हालांकि कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर वे वापस लौट गए।

ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल के विभिन्न परिसरों में 5वीं और 8वीं कक्षा की परीक्षाएं पहले ही कराई जा चुकी थीं। इसी बीच राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के तहत इन कक्षाओं की बोर्ड परीक्षा आयोजित करने का आदेश जारी किया, जिसके बाद यह विवाद उत्पन्न हुआ।

वहीं अमेरीचौक स्थित नारायणा टेक्नो स्कूल पर कक्षा 1 से 8 तक सीबीएसई पाठ्यक्रम के नाम पर अधिक शुल्क वसूलने का आरोप लगा है। जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक सीबीएसई की औपचारिक संबद्धता नहीं होती, बल्कि इन कक्षाओं का संचालन राज्य शासन के नियमों के तहत किया जाता है।

यह भी आरोप लगाया गया कि स्कूल प्रबंधन द्वारा शिकायत करने वाले अभिभावकों को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी जाती है। मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को निर्धारित की गई है, जिसमें स्कूल शिक्षा सचिव को विस्तृत जवाब प्रस्तुत करना होगा।

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