कन्या पूजन से कन्या संरक्षण तक: महासमुंद में 350 किशोरियों और माताओं को स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के प्रति किया जागरूक
महासमुंद, 15 अक्टूबर 2026। बेटियों का सम्मान केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा और अधिकारों की रक्षा से भी जुड़ा होना चाहिए। इसी संदेश के साथ छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने महासमुंद में “कन्या पूजन से कन्या संरक्षण तक” जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। अंबेडकर भवन, बागबाहरा रोड में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 350 किशोरी बालिकाओं और माताओं ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत 101 कन्याओं के पूजन और कन्या भोज से हुई। इसके बाद जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। विशेषज्ञों ने किशोरियों और माताओं को कैंसर से बचाव, माहवारी स्वच्छता, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, डिजिटल लत और बाल सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी।
101 कन्याओं के पूजन के साथ दिया संरक्षण का संदेश

आयोजन का उद्देश्य कन्या पूजन की परंपरा को बालिकाओं के अधिकारों और उनके प्रति सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना था। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि बेटियों का सम्मान किसी पर्व या विशेष अवसर तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके स्वस्थ जीवन, सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं।
जागरूकता कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने माताओं और किशोरियों को अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर बात करने, समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने और बच्चों की सुरक्षा के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव और HPV टीकाकरण पर जानकारी
बालको मेडिकल सेंटर, नया रायपुर की विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. यामिनी शुक्ला भविष्कर ने सर्वाइकल कैंसर के कारणों, संभावित लक्षणों और बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है। शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं हो सकते, इसलिए समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह महत्वपूर्ण है।
उन्होंने HPV जांच, पैप स्मीयर और HPV टीकाकरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला। अभिभावकों को सलाह दी गई कि वे अपनी बेटियों के टीकाकरण के संबंध में चिकित्सक से परामर्श लें और लागू पात्रता एवं सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्णय करें।

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों पर भी किया जागरूक
बालको मेडिकल सेंटर की वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. अनीशा ने स्तन कैंसर के संभावित लक्षणों और बचाव से संबंधित जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि स्तन में गांठ, आकार में बदलाव या त्वचा में असामान्य परिवर्तन दिखाई देने पर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और किशोरियों के लिए स्तन कैंसर स्क्रीनिंग से संबंधित पहल भी की गई। इसका उद्देश्य महिलाओं में समय पर जांच और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना था।
किशोरावस्था, माहवारी स्वच्छता और पोषण पर मार्गदर्शन

एम्स रायपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आकांक्षा साहू ने किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक बदलाव, माहवारी स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों पर जानकारी दी। उन्होंने किशोरियों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और किसी भी परेशानी की स्थिति में उचित चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया।
विशेषज्ञों ने बताया कि किशोरावस्था में सही जानकारी, संतुलित पोषण और स्वच्छता की आदतें अपनाना स्वस्थ जीवन के लिए महत्वपूर्ण है।
मोबाइल की लत और मानसिक स्वास्थ्य पर भी चर्चा
बाल मनोचिकित्सक डॉ. गार्गी पांडेय ने बच्चों की सुरक्षा, उनसे संवाद करने के तरीके और अभिभावकों के व्यवहार के महत्व पर बात की। उन्होंने मोबाइल के अत्यधिक उपयोग, बढ़ते स्क्रीन टाइम और डिजिटल लत के बच्चों पर पड़ने वाले प्रभावों के प्रति सचेत किया।
वहीं, आईटीएसए हॉस्पिटल, रायपुर की बाल मनोचिकित्सक डॉ. इशिका जायसवाल ने किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन, चिंता, आत्म-जागरूकता और आत्मविश्वास जैसे विषयों पर चर्चा की। उन्होंने बच्चों को सकारात्मक वातावरण देने और उनकी भावनाओं को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से भी बालिकाओं के सम्मान, संरक्षण और अधिकारों का संदेश दिया गया।
“हर बेटी को स्वस्थ और सुरक्षित बचपन देना आयोग का लक्ष्य” — डॉ. वर्णिका शर्मा
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि आज बच्चों के सामने स्वास्थ्य, मानसिक तनाव और सुरक्षा से जुड़ी अनेक चुनौतियां हैं। इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जागरूकता, समय पर जांच, उचित परामर्श और विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय जरूरी है।
उन्होंने बताया कि आयोग ने एम्स रायपुर, बालको मेडिकल सेंटर और आईटीएसए हॉस्पिटल जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर बालिकाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर संवाद की पहल की है। उन्होंने अभिभावकों से बेटियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की।
डॉ. शर्मा ने आयोग के दृष्टिकोण को “फ्रॉम डिलिबरेशन टू डिलीवरी” — यानी विचार-विमर्श से प्रभावी क्रियान्वयन बताते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त बचपन उपलब्ध कराना आयोग का लक्ष्य है।
जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में लिया जागरूकता का संकल्प
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्राकर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मोंगरा पटेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री भीखम ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर बालिकाओं और माताओं ने बेटियों के सम्मान, स्वास्थ्य और संरक्षण के प्रति जागरूक रहने तथा समाज में इस संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि कन्या पूजन की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब प्रत्येक बेटी को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान के समान अवसर मिलें।
