विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 का लोकार्पण, 21 लाख वर्ष पुराने कालखंड से 5 लाख वर्ष भविष्य तक की गणना संभव
भोपाल। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 के वॉल वर्जन का लोकार्पण किया। भारतीय कालगणना, पंचांग और खगोलीय गणनाओं को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़कर तैयार की गई यह घड़ी लाखों वर्षों की कालगणना को समझने और विभिन्न पंचांगीय जानकारियां प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करती है।
इस अवसर पर महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी और वैदिक क्लॉक रिस्ट वॉच के अन्वेषणकर्ता मयंक पाटीदार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को वैदिक रिस्ट वॉच भी भेंट की।
21 लाख वर्ष पुराने कालखंड से 5 लाख वर्ष भविष्य तक की गणना
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 की सबसे खास विशेषता इसकी विशाल कालगणना क्षमता है। इसमें करीब 21 लाख वर्ष पहले तक की पंचांगीय गणनाओं का अध्ययन किया जा सकता है। वहीं, आने वाले लगभग 5 लाख वर्षों तक की कालगणना भी देखी जा सकेगी।
किसी निर्धारित तिथि के आधार पर घड़ी उस समय की तिथि, पक्ष, नक्षत्र, योग, करण, हिंदू मास सहित अन्य पंचांग संबंधी जानकारियां उपलब्ध करा सकती है।
खास बात: भारतीय कालगणना की प्राचीन परंपरा को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ना इस घड़ी की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।
प्रधानमंत्री के सुझाव के बाद विकसित हुआ नया संस्करण
कार्यक्रम में बताया गया कि कुछ समय पहले काशी विश्वनाथ मंदिर में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के अवलोकन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे और अधिक परिष्कृत करने तथा प्राचीन भारतीय गणनाओं को इसमें शामिल करने का सुझाव दिया था।
इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए वैदिक घड़ी-2.0 विकसित की गई है। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, खगोलीय गणित और आधुनिक डिजिटल तकनीक का समन्वय किया गया है।
पंचांग और खगोलीय घटनाओं की मिलेगी जानकारी
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 में करीब 19 प्रमुख वैदिक और पंचांगीय तत्वों को शामिल किया गया है।
घड़ी में प्रमुख रूप से ये जानकारियां उपलब्ध होंगी:
- वैदिक समय
- मुहूर्त
- कला और काष्ठा
- सूर्योदय एवं सूर्यास्त
- चंद्रोदय एवं चंद्रास्त
- सूर्य राशि और चंद्र राशि
- तिथि एवं पक्ष
- हिंदू मास
- नक्षत्र
- योग एवं करण
- प्रमुख हिंदू त्योहार
- व्रत
- वृद्धि तिथि
- अधिक मास
- क्षय मास
नवग्रहों की स्थिति और ग्रहों की गति भी बताएगी घड़ी
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 में सूर्य और चंद्रमा सहित नवग्रहों की स्थिति से जुड़ी जानकारी भी प्रदर्शित की जाएगी।
इसमें ग्रहों की राशि, नक्षत्र में गोचर तथा ग्रहों की मार्गी और वक्री गति जैसी जानकारियां भी देखी जा सकेंगी।
बिना इंटरनेट के भी काम करेगी मुख्य कालगणना प्रणाली
इस घड़ी की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसकी मूल कालगणना प्रणाली को ऑफलाइन कार्य करने के लिए तैयार किया गया है। यानी इसकी मुख्य गणना सुविधाओं के लिए लगातार इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होगी।
स्मार्ट रिस्ट वॉच के रूप में भी विकसित
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 को अब केवल वॉल क्लॉक तक सीमित नहीं रखा गया है। इसे स्मार्ट रिस्ट वॉच के रूप में भी विकसित किया गया है।
रिस्ट वॉच में स्थान, अक्षांश और देशांतर के आधार पर वैदिक समय और पंचांग की जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
इसमें एक विशेष एनर्जी फीचर भी जोड़ा गया है, जो जन्म तिथि, समय और स्थान के आधार पर शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, आत्मिक और कार्मिक ऊर्जा के विश्लेषण का मॉडल प्रस्तुत करता है।
भारतीय विरासत और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 को भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के संगम के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य प्राचीन भारतीय कालगणना और पंचांग परंपरा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाना है।
यह पहल भारतीय विरासत, खगोलीय गणित और डिजिटल तकनीक को एक मंच पर लाने का प्रयास है, जिससे नई पीढ़ी भी भारत की प्राचीन कालगणना प्रणाली को आधुनिक स्वरूप में समझ सके।
📌 विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 की प्रमुख बातें
| विशेषता | जानकारी |
|---|---|
| लोकार्पण | मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव |
| स्थान | मुख्यमंत्री निवास, भोपाल |
| पुरानी गणना | करीब 21 लाख वर्ष पूर्व तक |
| भविष्य की गणना | करीब 5 लाख वर्ष तक |
| पंचांगीय तत्व | करीब 19 प्रमुख तत्व |
| ग्रहों की जानकारी | नवग्रहों की स्थिति एवं गति |
| मुख्य प्रणाली | ऑफलाइन कालगणना |
| नया स्वरूप | स्मार्ट रिस्ट वॉच |
| आधार | भारतीय कालगणना और खगोलीय गणित |
