समर्थन और विरोध के बीच पेलमा कोयला खदान परियोजना की जनसुनवाई संपन्न, भारी सुरक्षा के बीच पूरी हुई प्रक्रिया

रायगढ़। जिले के पेलमा गांव में प्रस्तावित पेलमा कोयला खदान परियोजना को लेकर सोमवार को आयोजित जनसुनवाई शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गई। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर ग्रामीणों ने खुलकर अपनी राय रखी। जनसुनवाई में परियोजना के समर्थन और विरोध, दोनों पक्षों की आवाजें सुनाई दीं।

पर्यावरण अधिकारी मनवेन्द्र शेखर पांडे ने बताया कि जनसुनवाई निर्धारित समय पर शुरू हुई और पूरे दिन शांतिपूर्ण तरीके से चली। उन्होंने कहा कि परियोजना के पक्ष और विपक्ष में अपनी बात रखने वाले लोगों की संख्या लगभग बराबर रही। अंतिम आंकड़ों का संकलन अभी किया जा रहा है।

2077 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित है खदान

करीब 2077.934 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित इस कोयला खदान की वार्षिक उत्पादन क्षमता 15 मिलियन टन (MTPA) निर्धारित की गई है। परियोजना का प्रभाव पेलमा, उरबा, मडुआडूमर, लालपुर, हिंझर, जरहीडीह, सकत्ता, मीलूपार और खर्रा समेत कई गांवों पर पड़ने की संभावना है।

इसी कारण प्रभावित क्षेत्र के लोगों की राय जानने के लिए पेलमा गांव के अटल चौक में जनसुनवाई आयोजित की गई, जहां सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीणों का पहुंचना शुरू हो गया था।

रोजगार और विकास के पक्ष में उठी आवाजें

जनसुनवाई के दौरान कई ग्रामीणों ने परियोजना का समर्थन करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और विकास की रफ्तार तेज होगी। समर्थकों का मानना है कि परियोजना से स्थानीय युवाओं को रोजगार और क्षेत्र को बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

पर्यावरण और विस्थापन को लेकर जताई चिंता

वहीं दूसरी ओर, प्रभावित गांवों के कई ग्रामीणों ने पर्यावरणीय प्रभाव, भूमि अधिग्रहण, विस्थापन और आजीविका पर पड़ने वाले असर को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। ग्रामीणों ने मांग की कि उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए और उचित समाधान सुनिश्चित किया जाए।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही तैनात

जनसुनवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात रहा और पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।

ग्रामीणों की राय होगी निर्णायक

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सुझावों, समर्थन और आपत्तियों को रिपोर्ट में शामिल कर आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित विभागों को भेजा जाएगा। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि परियोजना को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

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