संवैधानिक संस्थाओं पर कथित हमलों को लेकर हार्वर्ड से जुड़े भारतीयों ने जताई चिंता, बोले- संविधान सर्वोपरि

नई दिल्ली। हार्वर्ड विश्वविद्यालय से संबद्ध भारतीय नागरिकों के एक समूह ने भारत की संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाए जाने और उनके खिलाफ कथित तौर पर चलाए जा रहे सुनियोजित अभियानों पर चिंता जताई है। समूह ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI), सर्वोच्च न्यायालय, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के कार्यालय और संसद जैसी प्रमुख संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने की अपील की है। साथ ही, राजनीतिक विश्वसनीयता हासिल करने के लिए हार्वर्ड विश्वविद्यालय के नाम के कथित अनधिकृत इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है।

संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा पर दिया जोर

समूह की ओर से बुधवार को जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के भरोसे को कमजोर कर सकता है।

बयान के अनुसार, संवैधानिक अधिकारियों को ‘चोर’ या ‘समझौतावादी’ कहना और भारत की स्थिति को ‘घेराबंदी’ के रूप में प्रस्तुत करना गंभीर चिंता का विषय है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने सार्वजनिक विमर्श में संवैधानिक मूल्यों, नागरिक गरिमा और संस्थागत मर्यादा का सम्मान करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

आरोपों के बजाय ठोस सबूतों पर हो चर्चा

पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका पर समूह ने कहा कि उनकी कार्रवाइयों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही जरूरी है। हालांकि, ऐसी जांच तथ्यों और ठोस सबूतों पर आधारित होनी चाहिए।

बयान में यह भी कहा गया कि अपमानजनक बयानबाजी और बिना प्रमाण लगाए गए आरोप संस्थागत जवाबदेही या उचित कानूनी प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकते। लोकतांत्रिक व्यवस्था में आलोचना के साथ-साथ निष्पक्षता और प्रमाणों का महत्व भी बनाए रखना जरूरी है।

‘संविधान और कानून का शासन सर्वोपरि’

हार्वर्ड से संबद्ध भारतीयों ने अपने बयान में संविधान, कानून के शासन और नागरिक स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों का सम्मान हर परिस्थिति में होना चाहिए, न कि केवल तब जब वे किसी व्यक्ति या राजनीतिक पक्ष के हितों के अनुकूल हों।

समूह ने सभी पक्षों से संवैधानिक मर्यादा बनाए रखने और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने वाली बयानबाजी से बचने की अपील की।

महत्वपूर्ण बात: यह बयान हार्वर्ड विश्वविद्यालय से संबद्ध भारतीय नागरिकों के समूह का बताया गया है। इसे विश्वविद्यालय का आधिकारिक बयान तभी माना जाना चाहिए, जब इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि हो।

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