🇨🇳 Nepal-China Border Disaster: तिब्बत में भूस्खलन से 16 मौतें, 546 लापता; 49 भारतीयों की तलाश
बीजिंग। नेपाल-चीन सीमा से लगे चीन के शिजांग (तिब्बत) स्वायत्त क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। ग्यिरोंग पोर्ट में भूस्खलन के बाद 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 546 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिनमें 49 भारतीय नागरिक भी बताए गए हैं।
23 देशों के 261 विदेशी नागरिक लापता
चीनी अधिकारियों के अनुसार लापता विदेशी नागरिक 23 देशों से हैं। इनमें सबसे अधिक नेपाल के 104 नागरिक शामिल हैं।
| देश | लापता नागरिक |
|---|---|
| 🇳🇵 नेपाल | 104 |
| 🇮🇳 भारत | 49 |
| 🇱🇻 लातविया | 33 |
| 🇺🇸 अमेरिका | 18 |
| 🇬🇧 ब्रिटेन | 15 |
| 🇨🇦 कनाडा | 6 |
| 🇦🇺 ऑस्ट्रेलिया | 6 |
चीन ने संबंधित देशों के दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को स्थिति की जानकारी दे दी है। प्रभावित क्षेत्र में लापता लोगों की तलाश और पहचान का अभियान जारी है।
कुछ ही मिनटों में तबाह हो गया इलाका
वैज्ञानिकों के अनुसार नेपाल में लांगटांग लिरुंग पर्वत की दक्षिणी ढलान पर करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर टूटने के बाद भारी मात्रा में बर्फ और चट्टानों का मलबा नीचे आया।
करीब 22 किलोमीटर तक तेजी से आगे बढ़ा मलबा चीन के ग्यिरोंग पोर्ट तक पहुंचा, जहां लगभग 0.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र प्रभावित हुआ और 27 इमारतों व अन्य ढांचों को नुकसान पहुंचा।
ग्लेशियर टूटने से बनी आपदा
चीनी अधिकारियों की शुरुआती वैज्ञानिक जांच के मुताबिक 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने से ice-rock avalanche और उसके बाद debris flow बना। इसे हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर की अस्थिरता से जुड़ी गंभीर प्राकृतिक आपदा माना जा रहा है।
वैज्ञानिकों ने दीर्घकालिक तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन को भी ग्लेशियरों की अस्थिरता से जोड़कर देखा है।
2,141 से ज्यादा बचावकर्मी मैदान में
चीन ने प्रभावित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया है।
- 👷 2,141+ बचावकर्मी
- 🚙 269 वाहन
- 🛠️ करीब 3,900 उपकरण
- 🛰️ सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग
- 📡 स्लोप रडार
- 💧 हाइड्रोलॉजिकल सेंसर
इन तकनीकों के जरिए प्रभावित क्षेत्र और पहाड़ी ढलानों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
दो बैरियर लेक पर भी नजर
भूस्खलन के बाद इलाके में बनी दो अस्थायी बैरियर झीलों की भी निगरानी की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल इनके बांध अपेक्षाकृत स्थिर हैं, लेकिन स्थिति में बदलाव होने पर दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
भू-विज्ञानी पहाड़ी ढलानों पर भी नजर बनाए हुए हैं ताकि संभावित नए भूस्खलन के खतरे का समय रहते आकलन किया जा सके।
विस्थापितों के लिए बनाए गए राहत शिविर
चीनी प्रशासन ने प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालकर अस्थायी राहत केंद्रों में पहुंचाया है। ग्यिरोंग काउंटी के पांच प्रभावित गांवों के 499 लोगों को पांच अस्थायी राहत केंद्रों में भेजा गया है।
राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, आवश्यक सामग्री और चिकित्सा सुविधाओं के साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श की व्यवस्था भी की गई है।
🇳🇵 नेपाल में भी भारी तबाही
तिब्बत में हुई यह आपदा नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार नेपाल और तिब्बत में संयुक्त रूप से 750 मौतों और 3,000 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल में अकेले 734 मौतें और 2,498 लोगों के लापता होने की सूचना दी गई है।
🇮🇳 49 भारतीय नागरिकों की तलाश जारी
तिब्बत की ओर 49 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आने के बाद उनकी तलाश और पहचान प्रक्रिया पर विशेष नजर बनी हुई है।
चीनी प्रशासन ने संबंधित देशों को जानकारी उपलब्ध कराई है और प्रभावित क्षेत्र में व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। फिलहाल चीनी अधिकारियों के मुताबिक ग्यिरोंग काउंटी में कोई विदेशी पर्यटक फंसा हुआ नहीं मिला है, लेकिन लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है।
सीमा क्षेत्र में बढ़ी चिंता
नेपाल-चीन सीमा पर लगातार सामने आ रही बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं ने राहत एवं बचाव एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। 49 भारतीयों समेत सैकड़ों लापता लोगों की तलाश और संभावित नई आपदा पर निगरानी अब सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।
