छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग नियमों में बड़ा बदलाव, विकास और निवेश के लिए बनेगा आसान माहौल

आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्पष्ट नियम, नागरिकों से 15 दिन में मांगे गए सुझाव

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग और नगरीय नियोजन व्यवस्था को अधिक सरल, स्पष्ट और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत विभिन्न भूमि उपयोग क्षेत्रों में निषिद्ध गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा।

इस नई व्यवस्था का उद्देश्य अनावश्यक अनुपालन बोझ को कम करना, निवेशकों को स्पष्ट नियामकीय वातावरण उपलब्ध कराना और प्रदेश के शहरों एवं कस्बों में नियोजित विकास को गति देना है।

आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा और बेहतर जीवन-परिस्थितियों पर जोर

प्रस्तावित नियमों के तहत आवासीय क्षेत्रों में असंगत, प्रदूषणकारी और खतरनाक गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रावधान किया गया है। इससे आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा, पर्यावरणीय गुणवत्ता और बेहतर जीवन-परिस्थितियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

वाणिज्यिक क्षेत्रों के लिए स्पष्ट नियोजन

वाणिज्यिक भूमि उपयोग में नारंगी, लाल एवं नीली श्रेणी के उद्योगों, खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटक पदार्थों के भंडारण सहित कई गतिविधियों को निषिद्ध करने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा पशुपालन, मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार एवं कब्रिस्तान तथा खनन गतिविधियों को भी वाणिज्यिक क्षेत्रों में प्रतिबंधित करने का प्रावधान प्रस्तावित है।

औद्योगिक क्षेत्रों में भी तय होंगी निषिद्ध गतिविधियां

औद्योगिक भूमि उपयोग के लिए भी स्पष्ट नियोजन व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इसके तहत पूर्णतः आवासीय टाउनशिप, अनुमत कर्मचारी आवास को छोड़कर छात्रावास एवं शयनागार, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल और कारागार जैसी गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है।

इसके साथ ही बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील एवं असंगत गतिविधियों पर भी रोक का प्रस्ताव है।

कृषि भूमि पर बड़े मॉल और खतरनाक गतिविधियों पर रोक

कृषि भूमि उपयोग में आवासीय अभिन्यास, किफायती जन आवास एवं एकीकृत उपनगर को छोड़कर बड़े वाणिज्यिक परिसर और खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है।

विभिन्न श्रेणी के उद्योग, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं और बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को भी कृषि भूमि में प्रतिबंधित करने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

नई अर्थव्यवस्था के अनुरूप लचीली होगी नियोजन व्यवस्था

तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के साथ नई सेवाओं, व्यवसायों और तकनीकी गतिविधियों के स्वरूप भी लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में पहले से अनुमत गतिविधियों की लंबी सूची तय करने के बजाय निषिद्ध गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करने की नई व्यवस्था अपनाने का प्रस्ताव है।

इससे नई और उभरती गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे और नियोजन व्यवस्था अधिक लचीली बन सकेगी।

निवेशकों को मिलेगा स्पष्ट नियामकीय वातावरण

प्रस्तावित बदलाव से अनावश्यक अनुपालन बोझ कम होने और विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। निवेशकों को अधिक स्पष्ट और पूर्वानुमानित नियामकीय वातावरण मिलेगा।

इससे प्रदेश के शहरों और कस्बों में नियोजित विकास को बढ़ावा देने के साथ आवास, व्यापार, सेवाओं और अधोसंरचना से जुड़ी बदलती जरूरतों को पूरा करने में सुविधा होगी।

नागरिकों से 15 दिनों में मांगे गए सुझाव

प्रस्तावित संशोधन पर नागरिकों और संबंधित पक्षों से आपत्ति एवं सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिवस की अवधि में प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर शासन द्वारा विचार किया जाएगा।

इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।

भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव छत्तीसगढ़ में सरल नियमन, कम अनुपालन बोझ, स्पष्ट नियोजन और विकास के अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।

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