MP News: अमित शाह ने नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का किया शुभारंभ, 14 जोन में दिखी न्याय प्रक्रिया

भोपाल। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को भोपाल के भेल दशहरा मैदान में नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। दोनों नेताओं ने प्रदर्शनी के विभिन्न जोन का अवलोकन किया और न्याय व्यवस्था में हुए बदलावों की जानकारी ली।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में आयोजित यह पांच दिवसीय प्रदर्शनी 7 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। इसका उद्देश्य आम नागरिकों, विद्यार्थियों, युवाओं और कानून में रुचि रखने वाले लोगों को भारतीय न्याय व्यवस्था में हुए महत्वपूर्ण बदलावों और नई न्याय संहिताओं के प्रावधानों से परिचित कराना है।

14 जोन में दिखाई गई अपराध से न्याय तक की पूरी प्रक्रिया

प्रदर्शनी में अपराध की सूचना मिलने से लेकर पुलिस जांच, फॉरेंसिक परीक्षण, अभियोजन, न्यायालयीन कार्रवाई और अंतिम न्याय तक की पूरी प्रक्रिया को 14 अलग-अलग जोन में मॉडल, डिजिटल तकनीक, वीडियो, चार्ट और लाइव प्रदर्शन के जरिए समझाया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मध्यप्रदेश में नवीन न्याय संहिताओं के क्रियान्वयन, साइबर सुरक्षा एवं जागरूकता, पुलिस के सामाजिक अभियानों और विभिन्न नवाचारों की जानकारी दी।

डायल-112 से लेकर ई-एफआईआर तक की जानकारी

प्रदर्शनी के पहले जोन में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023 के प्रमुख प्रावधानों को प्रदर्शित किया गया है।

दूसरे जोन में डायल-112, आपातकालीन सेवाओं और आधुनिक स्टेट कमांड सेंटर की कार्यप्रणाली का लाइव प्रदर्शन किया गया। वहीं तीसरे जोन में क्राइम सीन और फॉरेंसिक जांच के लिए 3D मॉडल के माध्यम से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया दिखाई गई।

चौथे जोन में पुलिस थाने की कार्यप्रणाली, ई-एफआईआर, जीरो एफआईआर और CCTNS से संबंधित जानकारी दी गई है। पांचवें जोन में मेडिकल परीक्षण, पोस्टमार्टम और मेडिकल रिपोर्ट की भूमिका को प्रदर्शित किया गया।

DNA, फिंगरप्रिंट और डिजिटल फॉरेंसिक की भी जानकारी

छठे जोन में फॉरेंसिक साइंस लैब की भूमिका को प्रमुखता दी गई है। इसमें DNA, फिंगरप्रिंट, बैलिस्टिक और डिजिटल फॉरेंसिक जैसी तकनीकों के माध्यम से अपराध की वैज्ञानिक जांच को समझाया गया है।

सातवें जोन में विवेचना के बाद चार्जशीट तैयार करने से लेकर न्यायालय में प्रभावी पैरवी तक अभियोजन की भूमिका दिखाई गई है। आठवें जोन में जिला न्यायालय और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी तकनीकों के उपयोग को मॉडल के जरिए प्रदर्शित किया गया है।

जेल सुधार और हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली भी प्रदर्शित

नौवें जोन में जेल सुधार, ई-प्रिजन व्यवस्था, पैरोल और बंदियों के पुनर्वास कार्यक्रमों की जानकारी दी गई है।

दसवें जोन में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर के मुख्य कोर्ट रूम का मॉडल प्रदर्शित किया गया है। यहां पुलिस थाने में दर्ज FIR से लेकर उच्च न्यायपालिका तक पहुंचने वाली न्याय प्रक्रिया को क्रमबद्ध तरीके से समझाया गया है।

साइबर सुरक्षा और ई-जीरो एफआईआर पर विशेष जोर

ग्यारहवें जोन में नक्सल उन्मूलन से संबंधित उपलब्धियों को फोटो और डिजिटल माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।

बारहवें जोन में साइबर सुरक्षा और जागरूकता को केंद्र में रखा गया है। यहां ‘सेफ क्लिक अभियान’ और ऑनलाइन ई-जीरो एफआईआर की प्रक्रिया की जानकारी नागरिकों को दी जा रही है।

तेरहवें जोन में मध्यप्रदेश में नवीन न्याय संहिताओं के क्रियान्वयन और इसके लिए किए गए ढांचागत सुधारों की जानकारी डिजिटल चार्ट के माध्यम से दी गई है।

ऑपरेशन मुस्कान और ‘Say No to Drugs’ भी प्रदर्शनी का हिस्सा

चौदहवें जोन में सामाजिक अभियानों और लाइव डिजिटल क्विज को शामिल किया गया है। इसमें ऑपरेशन मुस्कान, महिला हेल्प डेस्क और ‘Say No to Drugs’ जैसे अभियानों की जानकारी दी गई है।

इसके साथ ही नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित लाइव डिजिटल क्विज भी आयोजित की जा रही है, जो प्रदर्शनी में आने वाले युवाओं और विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

त्वरित और तकनीक-सक्षम न्याय व्यवस्था का संदेश

प्रदर्शनी का उद्देश्य नागरिकों को यह समझाना है कि नवीन न्याय संहिताओं के तहत न्याय प्रक्रिया में तकनीक, वैज्ञानिक जांच और डिजिटल सेवाओं का किस तरह उपयोग किया जा रहा है।

आयोजकों के अनुसार, यह प्रदर्शनी आम नागरिकों को न्याय व्यवस्था में हुए बदलावों को सरल और व्यावहारिक तरीके से समझने का अवसर देगी। 7 अक्टूबर तक भेल दशहरा मैदान में चलने वाली इस प्रदर्शनी में नागरिक, विद्यार्थी, युवा और कानून में रुचि रखने वाले लोग हिस्सा ले सकते हैं।

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