CG News: बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम, आश्रम-छात्रावासों के लिए SOP प्रस्तावित; मंत्री रामविचार नेताम ने दिए कार्रवाई के निर्देश
रायपुर, 4 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ के आश्रम-छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों को लेकर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने महत्वपूर्ण पहल की है। आयोग ने प्रदेश के प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक, एकलव्य, प्रयास और कन्या शिक्षा परिसरों के सुरक्षित एवं जवाबदेह संचालन के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) प्रस्तावित की है।
इस संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने 4 नवंबर को आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के मंत्री रामविचार नेताम से सौजन्य भेंट कर विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। आयोग की ओर से प्रस्तुत सुझावों पर मंत्री ने शीघ्र और ठोस कार्रवाई करने के निर्देश देने की बात कही।
बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए प्रस्तावित SOP

आयोग ने आश्रम-छात्रावासों में स्वास्थ्य सुविधाओं, कर्मचारियों की जवाबदेही, लैंगिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कमियों को दूर करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इनका उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा के साथ POCSO एक्ट, 2012 और किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act), 2015 का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना है।
1. बीमारी की स्थिति में तत्काल उपचार और स्वास्थ्य सुविधा
आयोग ने मलेरिया, डायरिया, पीलिया, सिकलसेल और सर्पदंश जैसी समस्याओं से बच्चों की आकस्मिक मृत्यु रोकने के लिए प्रत्येक छात्रावास को नजदीकी 24 घंटे संचालित स्वास्थ्य केंद्र (PHC/CHC) और 108 संजीवनी एक्सप्रेस से जोड़ने का प्रस्ताव दिया है।
प्रस्ताव के अनुसार, किसी बच्चे को बुखार आने पर 2 से 6 घंटे के भीतर रक्त जांच और आवश्यकता पड़ने पर अस्पताल रेफरल की व्यवस्था अनिवार्य की जानी चाहिए।
2. अधीक्षकों का छात्रावास में रात्रि निवास अनिवार्य
छात्रावासों के संचालन में अधीक्षकों की जवाबदेही तय करने के लिए आयोग ने परिसर में ही उनका रात्रि निवास अनिवार्य करने का सुझाव दिया है। मुख्यालय छोड़कर अप-डाउन करने और छात्रावासों को केवल रसोइए या चौकीदार के भरोसे संचालित करने पर रोक लगाने की बात कही गई है।
इसके साथ ही रात 9 से 9:30 बजे के बीच जियो-फेंसिंग आधारित फेस-अटेंडेंस और एक व्यक्ति को केवल एक छात्रावास का प्रभार देने का प्रस्ताव भी शामिल है।
3. कन्या छात्रावासों में लैंगिक सुरक्षा पर विशेष जोर
कन्या आश्रमों और छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए आयोग ने केवल महिला अधीक्षक, महिला रसोइया और महिला गार्ड की तैनाती का सुझाव दिया है। प्रस्ताव में पुरुषों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात भी शामिल है।
इसके अलावा सभी प्रवेश द्वारों पर 30 दिन के बैकअप वाले नाइट-विजन CCTV कैमरे, बाल सुरक्षा नीति और शिकायत पेटी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
4. भवन सुरक्षा ऑडिट और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान
आयोग ने मानसून से पहले सभी छात्रावास भवनों का स्ट्रक्चरल और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट कराने की आवश्यकता बताई है। बच्चों की सुरक्षा के लिए मानक बाउंड्रीवॉल और खिड़कियों में मच्छरों से बचाव के लिए वायर मेश लगाने का भी सुझाव दिया गया है।
वहीं, आत्महत्या और पढ़ाई बीच में छोड़ने जैसी समस्याओं की रोकथाम के लिए नए विद्यार्थियों का 15 दिवसीय ओरिएंटेशन, ‘संगवारी बडी सिस्टम’ और क्लस्टर स्तर पर मनोवैज्ञानिक काउंसलर की नियुक्ति प्रस्तावित की गई है।
5. डिजिटल हेल्थ कार्ड, पौष्टिक भोजन और मासिक धर्म स्वच्छता
प्रत्येक छात्र का ABHA ID से लिंक डिजिटल हेल्थ कार्ड बनाने का प्रस्ताव भी SOP में शामिल है। सिकलसेल पॉजिटिव बच्चों को रेड कार्ड श्रेणी में रखकर नियमित दवा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है।
बच्चों को संतुलित और पौष्टिक भोजन देने के लिए महंगाई के अनुपात में भोजन भत्ता बढ़ाने तथा भोजन में रागी, कोदो-कुटकी जैसे स्थानीय अनाज, अंडा, दूध, हरी सब्जियां और गुड़-चना शामिल करने की बात कही गई है।
कन्या छात्रावासों में मासिक धर्म स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन, इंसिनरेटर (भस्मक) और साप्ताहिक आयरन-फोलिक एसिड (WIFS) की उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
बच्चों के लिए सुरक्षित और जवाबदेह व्यवस्था बनाने की पहल
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की इस पहल का उद्देश्य आश्रम-छात्रावासों में रहने वाले बच्चों को सुरक्षित वातावरण, समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर देखभाल उपलब्ध कराना है। अब प्रस्तावित SOP पर विभागीय स्तर पर होने वाली कार्रवाई और इसके क्रियान्वयन से प्रदेश के आवासीय संस्थानों की व्यवस्था में बदलाव की दिशा तय होगी।
