Bastar News: काछन गादी पूजा के साथ शुरू हुआ विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा, मां काछनदेवी ने दी महापर्व की अनुमति
जगदलपुर। अपनी अनूठी आदिवासी संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और गहरी धार्मिक आस्था के लिए विश्वभर में पहचान रखने वाले बस्तर के ऐतिहासिक दशहरा महापर्व की शुरुआत पारंपरिक पूजा विधान ‘काछन गादी’ के साथ हुई। करीब सात सदियों पुरानी इस परंपरा में पनका समाज की नाबालिग कन्या पीहू ने मां काछनदेवी का स्वरूप धारण किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अनुष्ठान के माध्यम से देवी से बस्तर दशहरा के आगामी कार्यक्रमों के निर्विघ्न आयोजन की अनुमति प्राप्त की जाती है।

पूजा विधान के दौरान देवी स्वरूप में विराजित कन्या को बेल के नुकीले कांटों से तैयार झूले पर लिटाया गया। इस पारंपरिक अनुष्ठान को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए। मान्यता के अनुसार, मां काछनदेवी ने बस्तर राजपरिवार, क्षेत्र की जनता और प्रशासन को 75 दिनों तक चलने वाले महापर्व के सफल आयोजन का आशीर्वाद दिया।
काछन गादी पूजा से जुड़ी है सदियों पुरानी परंपरा
बस्तर दशहरा की शुरुआत में काछन गादी पूजा का विशेष महत्व है। यह अनुष्ठान बस्तर की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक माना जाता है। इसमें पनका समाज की कन्या मां काछनदेवी के स्वरूप में पूजा विधान संपन्न करती है।
कांटों से बने झूले पर देवी स्वरूप में कन्या को विराजित करने की परंपरा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। इसी अनुष्ठान के साथ बस्तर दशहरा के विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला आगे बढ़ता है।
बस्तर राजपरिवार ने मां काछनदेवी और मां रैला देवी की पूजा की
अनुष्ठान के दौरान बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव ने मां काछनदेवी के समक्ष शीश झुकाकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने गोलबाजार पहुंचकर मिरगान समुदाय की इष्ट देवी मां रैला देवी की विधिवत पूजा-अर्चना की।
पूजा विधान के दौरान काछन गुड़ी और गोलबाजार क्षेत्र पारंपरिक वाद्ययंत्रों और मोहरी बाजा की ध्वनि से गूंज उठा। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न इन अनुष्ठानों ने बस्तर की सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की।
हजारों श्रद्धालु और पर्यटक बने साक्षी
बस्तर दशहरा की इस पारंपरिक शुरुआत को देखने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, श्रद्धालुओं और देश-विदेश से आए पर्यटकों की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, समिति के उपाध्यक्ष बलराम मांझी, महापौर संजय पाण्डे, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित मांझी-चालकी, नाइक-पाइक, पुजारी, गायता और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आदिवासी संस्कृति और सामुदायिक एकता का प्रतीक है बस्तर दशहरा
बस्तर दशहरा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की जीवंत आदिवासी संस्कृति, सामाजिक सहभागिता और अटूट आस्था का प्रतीक है। यह महापर्व आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित है और इसमें क्षेत्र के विभिन्न समुदाय अपनी पारंपरिक भूमिकाओं के साथ भाग लेते हैं।
काछन गादी पूजा के साथ महापर्व के विविध अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई है। आने वाले दिनों में बस्तर की अनूठी परंपराएं, धार्मिक विधान और सांस्कृतिक आयोजन इस ऐतिहासिक उत्सव को विशेष पहचान देंगे।
