राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट का झटका, चेक बाउंस मामले में जमा करने होंगे ₹2 करोड़

नई दिल्ली। चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने बुधवार को उन्हें शिकायतकर्ता के पास ₹2 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रकम जमा किए जाने के बाद ही हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर विचार किया जाएगा।

राजपाल यादव सुनवाई के दौरान खुद सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहे और ₹1.15 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट लेकर पहुंचे।

बाकी ₹85 लाख संपत्ति के खरीदार से जमा होंगे

राजपाल यादव के वकील ने अदालत को बताया कि आरटीजीएस के जरिए भुगतान की अनुमति नहीं मिल सकी, इसलिए ₹1.15 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट पेश किया गया है। वहीं, बाकी ₹85 लाख उनकी संपत्ति के खरीदार की ओर से जमा किए जाएंगे।

संपत्ति खरीदने वाला व्यक्ति भी सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद था।

सुप्रीम कोर्ट ने दी सजा बढ़ाने की चेतावनी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव के रवैये पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि बार-बार समय देने का उद्देश्य शिकायतकर्ता को उसकी रकम वापस दिलाना था।

कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए सजा बढ़ाई भी जा सकती है। पीठ ने टिप्पणी की कि कानून का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जाना चाहिए।

‘अता पता लापता’ फिल्म के नुकसान का किया जिक्र

सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ से हुए आर्थिक नुकसान का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फिल्म के कारण उन्हें करीब ₹200-250 करोड़ का नुकसान हुआ।

इस पर सीजेआई ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि फिल्म की तरह उनका पैसा भी “अता पता लापता” है।

राजपाल यादव ने किया अदालत का अभिवादन

सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने पीठ का अभिवादन करते हुए कहा, “प्रणाम करता हूं।” इस पर सीजेआई ने उन्हें आगे अच्छी फिल्में बनाने और लोगों का मनोरंजन करते रहने की सलाह दी।

करीब ₹5 करोड़ की देनदारी से जुड़ा है मामला

राजपाल यादव के मुताबिक, विवाद करीब ₹5 करोड़ की देनदारी से जुड़ा है और इसकी शुरुआत वर्ष 2010 के आसपास हुई थी।

आरोप है कि फिल्म निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स की ओर से उन्हें रकम दी गई थी। इसके भुगतान के लिए ₹1.05 करोड़ के सात चेक जारी किए गए, लेकिन ये चेक बाउंस हो गए। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा।

बोले- फिल्म बनाने के लिए नहीं लिया जाता लोन

बाद में राजपाल यादव ने दिल्ली में कहा कि फिल्म निर्माण के लिए इसे सामान्य तौर पर लोन की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक यह पैकेज डील या निवेश का स्वरूप हो सकता है।

उन्होंने न्यायपालिका और देश के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।

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