सुशासन को मिलेगी नई दिशा: मध्यप्रदेश सरकार और IIWM के बीच हुआ बड़ा समझौता, रिसर्च व वेस्ट मैनेजमेंट पर होगा फोकस
भोपाल। मध्यप्रदेश में सुशासन, सार्वजनिक नीति और पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वेस्ट मैनेजमेंट (IIWM) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी के माध्यम से शोध, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और सतत विकास से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा।
सुशासन और सतत विकास पर रहेगा विशेष फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार लोक नीति और सुशासन के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, संसाधन प्रबंधन और सार्वजनिक नीति जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग से प्रदेश को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
IIWM के साथ हुआ एमओयू
भोपाल स्थित समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में आयोजित कार्यक्रम में दोनों संस्थानों के बीच औपचारिक रूप से एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
समझौते पर—
- अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान की ओर से उपाध्यक्ष प्रो. राजीव दीक्षित
- इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वेस्ट मैनेजमेंट (IIWM) की ओर से मैनेजिंग ट्रस्टी प्रवीण रामदास
ने हस्ताक्षर किए।
शोध, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को मिलेगा बढ़ावा
एमओयू के तहत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से—
- ✅ सार्वजनिक नीति पर शोध कार्य
- ✅ वेस्ट मैनेजमेंट और पर्यावरण संरक्षण
- ✅ प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम
- ✅ अकादमिक और व्यावसायिक गतिविधियां
- ✅ सुशासन से जुड़े नवाचार एवं व्यावहारिक समाधान
पर मिलकर कार्य करेंगे।
इस पहल का उद्देश्य नीति निर्माण और पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण ज्ञान विकसित करना तथा प्रभावी समाधान तैयार करना है।
कार्यक्रम में रहे कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद
इस अवसर पर कई प्रमुख अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे, जिनमें—
- मुख्य कार्यपालन अधिकारी विभाष ठाकुर
- IIWM के न्यासी विजय सखलेचा
- गवर्निंग काउंसिल सदस्य डॉ. एन. पी. शुक्ला
- मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी
- हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष अशोक कड़ेल
शामिल रहे।
