छत्तीसगढ़ में मानसून का असमान असर: 10 जुलाई तक 89% बारिश, सारंगढ़-बिलाईगढ़ सबसे आगे, सुकमा सबसे पीछे
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में मानसून ने इस वर्ष अलग-अलग जिलों में अलग-अलग रंग दिखाए हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 10 जुलाई 2026 तक प्रदेश में औसतन 256.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो इस अवधि की सामान्य औसत वर्षा 287.4 मिमी का 89.1 प्रतिशत है। वहीं 10 जुलाई को प्रदेश में औसतन 7.0 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
राज्य में कई जिलों में सामान्य से कहीं अधिक वर्षा हुई है, जबकि कुछ जिले अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सबसे ज्यादा बारिश
बारिश के मामले में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला प्रदेश में सबसे आगे है। यहां अब तक 465.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य औसत 233.9 मिमी की तुलना में 198.9 प्रतिशत है।
इन जिलों में भी सामान्य से अधिक वर्षा हुई—
- बलरामपुर – 132.2%
- सक्ती – 123.1%
- दंतेवाड़ा – 119.9%
- रायपुर – 118.3%
इन जिलों में जलाशयों और खेतों में पर्याप्त पानी पहुंच चुका है।
सुकमा और मोहला-मानपुर में कमजोर मानसून
दक्षिण छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मानसून अब तक कमजोर बना हुआ है।
- सुकमा – 220.6 मिमी वर्षा (सामान्य का 51.4%)
- मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी – 54.7% वर्षा
इन क्षेत्रों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है।
राजधानी रायपुर में आज बारिश नहीं, फिर भी सामान्य से अधिक वर्षा
राजधानी रायपुर में 10 जुलाई को बारिश नहीं हुई, लेकिन अब तक 296.9 मिमी वर्षा दर्ज हो चुकी है, जो सामान्य का 118.3 प्रतिशत है।
इसी प्रकार—
- दुर्ग में आज 3.2 मिमी वर्षा हुई।
- जिले में अब तक 281.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य का 111.4 प्रतिशत है।
जशपुर में झमाझम बारिश, बिलासपुर-बस्तर को अभी और बारिश की जरूरत
- जशपुर में आज 17.4 मिमी बारिश दर्ज की गई। अब तक कुल वर्षा 227.9 मिमी (76.6%) पहुंच चुकी है।
- बिलासपुर में आज 5.5 मिमी बारिश हुई और कुल वर्षा सामान्य का 79.1 प्रतिशत रही।
- बस्तर में 8.1 मिमी वर्षा दर्ज हुई, जबकि कुल वर्षा सामान्य का 78.4 प्रतिशत है।
- सरगुजा में आज 7.2 मिमी बारिश हुई, लेकिन कुल वर्षा अभी 136.5 मिमी (65%) ही पहुंच पाई है।
विभाग की नजर मानसून की स्थिति पर
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग लगातार प्रदेशभर में वर्षा की स्थिति की निगरानी कर रहा है। आगामी दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने पर कम वर्षा वाले जिलों में भी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
