कांकेर का ‘मावा मोदोल’ बन रहा युवाओं के सपनों का पता, रोज़ 1000 छात्र कर रहे तैयारी

कांकेर। कभी न्यायिक गतिविधियों का केंद्र रहा कांकेर का ऐतिहासिक पुराना कचहरी परिसर आज शिक्षा, संस्कृति और युवाओं के भविष्य को नई दिशा देने वाला प्रेरणादायी केंद्र बन चुका है। जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी पहल ‘हमर लक्ष्य’ के तहत विकसित सेंट्रल लाइब्रेरी सह मावा मोदोल अब हजारों विद्यार्थियों के लिए सफलता की नई उम्मीद बनकर उभर रहा है।

कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मंडावी के मार्गदर्शन में संचालित यह केंद्र न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का प्रमुख ठिकाना बन गया है, बल्कि जिले की सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊर्जा दे रहा है। यहां पढ़ने वाले युवा अपने सपनों को साकार करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं और सफलता की नई कहानियां लिख रहे हैं।

प्रतिदिन पहुंच रहे लगभग 1000 विद्यार्थी

सेंट्रल लाइब्रेरी सह मावा मोदोल के नोडल अधिकारी एवं जिला मिशन समन्वयक नवनीत पटेल के अनुसार, वर्तमान में प्रतिदिन करीब एक हजार विद्यार्थी इस अध्ययन केंद्र का लाभ उठा रहे हैं। शांत, स्वच्छ और अनुशासित वातावरण विद्यार्थियों को एकाग्र होकर पढ़ाई करने का अवसर देता है।

यहां छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों के लिए मैराथन क्लासेस भी आयोजित की जा रही हैं, जिनमें बड़ी संख्या में युवा हिस्सा ले रहे हैं।

89 युवाओं ने हासिल की सरकारी नौकरी

जिला शिक्षा अधिकारी रमेश कुमार निषाद के मार्गदर्शन में इस केंद्र को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है। इसका सकारात्मक परिणाम यह है कि अब तक यहां अध्ययन कर चुके 89 युवा विभिन्न शासकीय पदों पर चयनित हो चुके हैं। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और बेहतर संसाधन मिलने पर ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के युवा भी बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं।

शिक्षा के साथ संस्कृति संरक्षण का भी केंद्र

पुराना कचहरी परिसर केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है। यहां स्थापित कोयाबाना आदिवासी संग्रहालय स्थानीय जनजातीय संस्कृति, परंपराओं, जीवनशैली और इतिहास को सहेजने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

इसके साथ ही परिसर में गोंडी और हल्बी भाषाओं का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 80 विद्यार्थी इन भाषाओं का अध्ययन कर रहे हैं, जिससे नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रह सके।

इतिहास, हरियाली और आधुनिक शिक्षा का अनूठा संगम

ऐतिहासिक प्रवेश द्वार, सुंदर उद्यान, हरियाली और स्वच्छ वातावरण से सुसज्जित यह परिसर विद्यार्थियों, अभिभावकों और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करता है। शिक्षा, संस्कृति और नवाचार का यह अनूठा संगम आज कांकेर जिले के विकास मॉडल की पहचान बनता जा रहा है।

सेंट्रल लाइब्रेरी सह मावा मोदोल न केवल युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिला रहा है, बल्कि उन्हें अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत से जोड़ते हुए आत्मविश्वास से भरे भविष्य की ओर भी अग्रसर कर रहा है।

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