मनरेगा से ग्रामीणों को मिली नई ताकत: रायगढ़ की 7 पंचायतों में बनेंगे आधुनिक बकरी पालन शेड, बढ़ेगी आय

रायगढ़। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अब केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। रायगढ़ जिले की 7 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत लगभग 3 लाख रुपये की लागत से आधुनिक बकरी पालन शेड स्वीकृत किए गए हैं। इस पहल से पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन करने का अवसर मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आएगा।

आधुनिक शेड से पशुओं को मिलेगा सुरक्षित आवास

ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन आजीविका का प्रमुख साधन माना जाता है, लेकिन उचित आवास की कमी के कारण पशुपालकों को अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है। मनरेगा के तहत बनने वाले आधुनिक बकरी पालन शेड पशुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और अनुकूल वातावरण प्रदान करेंगे।

वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप तैयार किए जाने वाले ये शेड ऊंचे प्लेटफॉर्म पर बनाए जाएंगे, जिससे पशु बारिश, जलभराव और अत्यधिक गर्मी से सुरक्षित रहेंगे। बेहतर वेंटिलेशन, स्वच्छता और जल निकासी की व्यवस्था पशुओं को बीमारियों से बचाने में मदद करेगी, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता और स्वास्थ्य दोनों बेहतर होंगे।

एक ही परिसर में बकरी और देशी मुर्गी पालन

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका एकीकृत आजीविका मॉडल है। बकरी शेड के नीचे देशी मुर्गी पालन की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे ग्रामीण परिवार एक ही स्थान पर दो अलग-अलग व्यवसाय संचालित कर सकेंगे।

बकरी पालन से दूध, जैविक खाद और पशुधन बिक्री के माध्यम से आय होगी, जबकि देशी मुर्गी पालन से अंडा और मांस उत्पादन के जरिए अतिरिक्त कमाई का अवसर मिलेगा। इससे छोटे और सीमांत किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

वैज्ञानिक प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सुविधाएं भी मिलेंगी

योजना के अंतर्गत पशुपालकों को हरे चारे की व्यवस्था, संतुलित पशु आहार, नियमित टीकाकरण, पशु स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक पशुपालन तकनीकों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पशुपालन को अधिक लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकेगा।

आत्मनिर्भर गांवों की ओर बढ़ता कदम

मनरेगा के तहत विकसित किया जा रहा यह आधुनिक बकरी एवं मुर्गी पालन मॉडल ग्रामीण विकास और आर्थिक सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रहा है। यह पहल न केवल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाएगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर पैदा कर गांवों को आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में यह योजना एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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