सरकार के नए नियम: एआई जनित फोटो-वीडियो की पहचान बताना जरूरी, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर AI टूल्स से बनाए गए नकली वीडियो, फोटो और ऑडियो के फैलाव को रोकने के लिए भारत सरकार ने सख्त नियमों की घोषणा की है। अब सोशल मीडिया कंपनियों और यूजर्स दोनों पर ज़िम्मेदारी डाली गई है ताकि झूठी जानकारी का प्रसार रोका जा सके।

नए नियमों की मुख्य बातें

AI से बनाए गए हर वीडियो, फोटो या ऑडियो में कम से कम 10% हिस्से पर “AI जनित” का लेबल लगाना अब अनिवार्य है। इससे यूजर्स को पता चलेगा कि कंटेंट मशीन द्वारा बनाया गया है।

सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर्स से यह पूछना होगा कि अपलोड किया जा रहा कंटेंट AI से बना है या नहीं। इसके लिए उन्हें ऑटोमेटेड वेरिफिकेशन टूल्स का इस्तेमाल करना होगा। नियम तोड़ने वाले यूजर्स को हर तीन महीने में पेनाल्टी का रिमाइंडर दिया जाएगा।

डीपफेक या भ्रामक AI कंटेंट को पहचानते ही प्लेटफ़ॉर्म्स को उसे **3 घंटे के भीतर** हटाना होगा। पहले यह समयसीमा 36 घंटे की थी, लेकिन अब इसे कम करके कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाई गई है।

सरकार का कहना है कि AI टूल्स ने कंटेंट बनाने को आसान तो बनाया, लेकिन झूठ फैलाने का रास्ता भी खोल दिया। अब हर यूजर को यह सोचना होगा कि वह जो कंटेंट शेयर कर रहा है, वह वास्तविक है या नहीं।

इन नियमों से न केवल नकली समाचारों पर अंकुश आएगा, बल्कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स पर भरोसा भी बढ़ेगा। सरकार का लक्ष्य AI के सकारात्मक उपयोग को बढ़ावा देते हुए उसकी दुरुपयोग रोकना है।

AI की ताक़त को गलत हाथों में जाने से रोकने के लिए ये कदम महत्वपूर्ण हैं। अब यूजर्स और प्लेटफ़ॉर्म्स दोनों को सतर्क रहना होगा ताकि इंटरनेट पर सच्चाई और पारदर्शिता बनी रहे।

About The Author