शिवरात्रि की रात क्यों जरूरी है रीढ़ की हड्डी सीधी रखना? जानें ब्रह्मांडीय ऊर्जा और जागरण का रहस्य

धार्मिक मान्यताओं अनुसार महाशिवरात्रि की रात में ब्रह्मांडीय ऊर्जा अत्यधिक सक्रिय रहती है। ऐसे में पूरी रात जागकर किया गया जप-तप और ध्यान कई गुना ज्यादा फलदायी होता है। यही कारण है कि इस रात कई श्रद्धालु रात्रि के चारों प्रहर में पूजा करते हैं। कहते हैं इस रात में रीड की हड्डी सीधी होनी चाहिए जिससे ऊर्जा के प्राकृतिक चढ़ाव का लाभ उठाया जा सके। साथ ही शरीर के भीतर एक नई शक्ति का संचार हो सके। लेकिन अब सवाल ये आता है कि अगर किसी कारण इस पूरी रात जागना संभव न हो तो ऐसे में क्या करें? क्या किसी खास मुहूर्त में जागकर पूरी रात के जागरण का लाभ मिल सकता है? चलिए जानते हैं।

महाशिवरात्रि की रात में क्या करना चाहिए?

महाशिवरात्रि की रात में जागकर भगवान शिव का ध्यान, जप और भजन करना चाहिए।
आज के दिन रात्रि के प्रथम प्रहर में दूध से, दूसरे प्रहर में दही से, तीसरे प्रहर में घी से और चौथे प्रहर में मधु, यानि शहद से शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए और हर प्रहर में शिवलिंग को स्नान कराते समय अलग-अलग मंत्रों के जप की बात भी कही गयी है।
प्रथम प्रहर में- ‘ह्रीं ईशानाय नमः। दूसरे प्रहर में- ‘ह्रीं अघोराय नमः।’ तीसरे प्रहर में- ‘ह्रीं वामदेवाय नमः। और चौथे प्रहर में- ‘ह्रीं सद्योजाताय नमः।’ मंत्र का जप करते हुए शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए।
इसके अलावा शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि आज के दिन दूसरे, तीसरे और चौथे प्रहर में व्रती को पूजा, अर्घ्य, जप और कथा सुननी चाहिए, स्तोत्र पाठ करना चाहिए और भगवान को प्रणाम करना चाहिए।
जबकि एक अन्य मत के अनुसार चन्दन के लेप से आरम्भ कर सभी उपचारों के साथ शिव पूजा करनी चाहिए और अग्नि में तिल, चावल और घी मिश्रित भात, यानि पके हुए चावल की आहुति देनी चाहिए।
फिर इस प्रकार हवन के बाद किसी एक साबुत फल की आहुति भी देनी चाहिए।
सामान्यतया लोग सूखे नारियल फल की आहुति देते हैं।
इसके अलावा आज के दिन शिव कथा का पाठ करना चाहिए और पुनः अर्धरात्रि, रात्रि के तीसरे प्रहर और चौथे प्रहर में भी आहुतियां डालनी चाहिए और फिर अगले दिन सूर्योदय के समय ऊँ नमः शिवाय मंत्र का पाठ करना चाहिए।

अगर पूरी रात नहीं जाग सकते तो क्या करें (Maha Shivratri Ki Raat Mein Nahi Jag Sakte Toh Kya Kare)
वैसे तो महाशिवरात्रि की पूरी रात जागना चाहिए। लेकिन अगर ऐसा कर पाना संभव नहीं है तो कम से कम महाशिवरात्रि की मध्य रात्रि यानी निशिता काल मुहूर्त में तो जरूर ही जागें। महाशिवरात्रि पर निशिता काल मुहूर्त रात 12:09 से 01:01 बजे तक रहेगा। इस समय शिवलिंग का अभिषेक करना और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना बेहद शुभ फलदायी माना जाता है।

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