रूमेटोलॉजिक रोग: जोड़ों से लेकर दिल–गुर्दे तक असर… समय पर पहचान बेहद ज़रूरी!

रायपुर। रूमेटोलॉजिक रोगों को अक्सर लोग सिर्फ ‘जोड़ों का दर्द’ समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि हकीकत यह है कि ये बीमारियाँ शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों — यकृत, फेफड़े, गुर्दे, दिल, त्वचा और आँखों — को भी प्रभावित कर सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन रोगों के शुरुआती संकेतों को नज़रअंदाज़ करना कई बार गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकता है।

किसे हो सकते हैं ये रोग ?

डॉ. जूही दीक्षित के अनुसार, रूमेटोलॉजिक रोग किसी भी उम्र में हो सकते हैं — पुरुष, महिलाएँ, युवा और यहाँ तक कि बच्चे भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। आम धारणा है कि गठिया केवल बुज़ुर्गों की बीमारी है, लेकिन यह पूरी तरह गलत है।“हमारे पास आने वाले ज़्यादातर मरीज़ 15–50 वर्ष की युवा महिलाएँ होती हैं। बच्चों में इसे जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस कहा जाता है.

लक्षण जिन्हें नज़रअंदाज़ न करें...

जोड़ों में दर्द व सूजनसुबह 30 मिनट से अधिक अकड़नपीठ या गर्दन का लगातार दर्द, लंबे समय तक बुखार, लगातार थकान, त्वचा पर चकत्ते, मुँह के छाले, आँखों में लालिमा, दर्द या सूखापन, ठंड में उंगलियों का नीला पड़ना, बालों का झड़ना, मांसपेशियों में कामजोरी लक्षणों का अलग-अलग संयोजन किसी रूमेटोलॉजिक बीमारी का संकेत हो सकता है।

क्या ये बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं?

डॉक्टरों के अनुसार, ये रोग शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की असामान्य सक्रियता के कारण होते हैं। इन्हें पूरी तरह ठीक करना अभी संभव नहीं है, लेकिन आधुनिक दवाइयाँ लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित कर देती हैं और बीमारी की गति को धीमा करती हैं।“साइंस तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, और आने वाले समय में कई बीमारियों के उपचारात्मक विकल्प भी सामने आ सकते हैं”—डॉ. दीक्षित।

आहार और व्यायाम—क्या है सही?

किसी एक डाइट या एक तरह का व्यायाम सभी पर लागू नहीं होता।रोग की स्थिति और प्रभावित अंगों के आधार पर ही डॉक्टर सही सलाह देते हैं। इसलिए “सेल्फ-ट्रीटमेंट” या इंटरनेट आधारित टिप्स अपनाने से बचने की सलाह दी जाती है।

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