टैरिफ को लेकर ट्रंप की सख्ती, फ्रांस को 200 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि रूस से तेल की खरीद कम नहीं की गई तो यह शुल्क बढ़ाकर 500 प्रतिशत तक किया जा सकता है। इसके अलावा ट्रंप ने अन्य देशों पर भी टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है। इसी क्रम में फ्रांस को भी निशाने पर लिया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि यदि फ्रांस ने गाजा के लिए प्रस्तावित शांति बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार नहीं किया, तो फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। यह बयान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने से इनकार करने के बाद आया है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि फ्रांस में राष्ट्रपति मैक्रों की लोकप्रियता कम हो रही है और वे अधिक समय तक पद पर नहीं रहेंगे। ट्रंप का कहना है कि मैक्रों ने गाजा के लिए प्रस्तावित शांति बोर्ड में शामिल होने के अमेरिकी निमंत्रण को ठुकरा दिया है, जिससे वे नाराज हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्रांस का मानना है कि यह बैठक केवल गाजा तक सीमित नहीं है, इसी कारण उसने इसमें शामिल होने से इनकार किया। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि बैठक की स्थायी सदस्यता के लिए प्रस्तावित एक अरब डॉलर की फीस के कारण फ्रांस ने दूरी बनाई, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बोर्ड ऑफ पीस एक अमेरिकी नेतृत्व वाला अंतर-सरकारी संगठन है, जिसका गठन ट्रंप प्रशासन के दौरान किया गया है। इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, व्यवसायी और पूर्व राष्ट्रपति सलाहकार जेरेड कुशनर तथा ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर जैसे सदस्य शामिल हैं। संगठन का उद्देश्य फिलिस्तीन में एक तकनीकी सरकार की स्थापना और गाजा के पुनर्निर्माण से जुड़ा बताया जा रहा है।

इस बीच ट्रंप और मैक्रों के बीच हुई बातचीत भी चर्चा में है, जिसमें दोनों नेताओं ने सीरिया, ईरान और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर अपने-अपने विचार रखे। मैक्रों ने दावोस शिखर सम्मेलन के बाद जी-7 की बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव भी दिया है और ट्रंप को पेरिस में रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया है। अब यह देखना होगा कि ट्रंप अपनी चेतावनी पर अमल करते हैं या टैरिफ को लेकर नरमी दिखाते हैं।

About The Author