विमान हादसों के रहस्यों को सुलझाने वाला उपकरण ब्लैक बॉक्स, जानें कैसे करता है काम
बारामती। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे के बाद एक बार फिर ‘ब्लैक बॉक्स’ चर्चा में है। किसी भी विमान दुर्घटना के कारणों का सटीक पता लगाने के लिए यह उपकरण सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। हादसे के बाद जांच टीमें सबसे पहले इसी की तलाश करती हैं क्योंकि इसमें उड़ान के दौरान की हर गतिविधि दर्ज होती है।
ब्लैक बॉक्स वास्तव में एक फ्लाइट रिकॉर्डर है जिसमें विमान और उड़ान से जुड़ा हर डेटा सुरक्षित रहता है। इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि यह भीषण विस्फोट, आग, उच्च तापमान और पानी के दबाव को झेल सके। इसका आविष्कार 1930 के दशक में फ्रांसीसी इंजीनियर फ्रांस्वा हुसैनो ने किया था। शुरुआत में यह फोटोग्राफिक फिल्म पर आधारित था, लेकिन अब इसमें आधुनिक मेमोरी चिप्स का उपयोग होता है।
इसका रंग नारंगी होता है ताकि मलबे में इसे आसानी से खोजा जा सके, लेकिन प्रकाश-रोधी डिब्बे में होने के कारण इसे पारंपरिक रूप से ‘ब्लैक बॉक्स’ कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से दो हिस्से होते हैं। पहला, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) जो विमान की ऊंचाई, गति और इंजन की स्थिति जैसी तकनीकी जानकारी रिकॉर्ड करता है। दूसरा, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) जो पायलटों के बीच की बातचीत और केबिन की आवाजों को दर्ज करता है।
इसके अलावा आधुनिक विमानों में डीवीआर उपकरण भी होता है, जो कैमरों के माध्यम से कॉकपिट और केबिन की फुटेज रिकॉर्ड करता है। इन सभी उपकरणों से प्राप्त जानकारी के आधार पर ही जांच अधिकारी यह तय कर पाते हैं कि हादसा किसी तकनीकी खराबी के कारण हुआ या फिर मानवीय चूक की वजह से।
