रायपुर साहित्य उत्सव में चित्रकला प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

रायपुर। पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव में साहित्य के साथ-साथ चित्रकला के रंग भी दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। सुरेंद्र दुबे मंडप में लगी छत्तीसगढ़ की विविधता को दर्शाती चित्रकला प्रदर्शनी लोगों का मन मोह रही है। प्रदर्शनी की शुरुआत छत्तीसगढ़ महतारी के भव्य चित्र से होती है, जिसमें एक हाथ में पंडवानी का तंबूरा, दूसरे में हंसिया और धान की बाली के साथ आशीर्वाद देती हुई महतारी का रूप दर्शाया गया है।

यह चित्र रायपुर की कलाकार सोनल शर्मा द्वारा बनाया गया है। इसके बाद अवध कंवर की पेंटिंग में बस्तर का बाजार जीवंत नजर आता है, मानो कविता चित्र का रूप ले चुकी हो। जांजगीर की कलाकार दिव्या चंद्रा ने राजिम कुंभ को अपनी कृति में पूरे आध्यात्मिक वैभव के साथ उकेरा है, जिसे देखकर तीर्थ की अनुभूति होती है।

रामगढ़ की पहाड़ियों पर आधारित चित्र भी दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहे हैं। इन चित्रों में पहाड़ियों का सजीव चित्रण ऐसा प्रतीत होता है मानो यहीं कालिदास ने मेघदूत की रचना की प्रेरणा पाई हो।

कार्यशाला के संयोजक भोजराज धनगर ने बताया कि नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर इस विशेष चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। इसमें प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और जनजीवन को दर्शाती अनेक कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं।

इसके साथ ही सुरेंद्र दुबे मंडप में पेंटिंग और कार्टून कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं, जहां युवा कलाकारों और विद्यार्थियों को अनुभवी कलाकारों से मार्गदर्शन मिल रहा है। कार्यशालाओं में रंगों की तकनीक, रेखांकन और भावात्मक प्रस्तुति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

साहित्य उत्सव में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, विद्यार्थी और आम दर्शक शामिल हो रहे हैं। कला और साहित्य के इस संगम ने उत्सव को बहुआयामी स्वरूप प्रदान किया है, जहां शब्दों के साथ रंग भी भावनाओं को अभिव्यक्त कर रहे हैं।

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